Iran US Conflict: अमेरिका की ओर से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कतर और कुवैत में हमले करने का दावा किया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. बढ़ते तनाव के बीच पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा सैन्य तनाव
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के उत्तरी हिस्सों और रणनीतिक महत्व वाले कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इन हमलों में कुछ महत्वपूर्ण पुलों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है. साथ ही ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी फिर से लागू करने की बात भी कही गई है.
ईरान ने जवाबी कार्रवाई का किया दावा
ईरान का कहना है कि उसने बहरीन, कतर और कुवैत में हमले किए हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, दक्षिणी होर्मुजगन प्रांत में हुए हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है. वहीं हालिया अमेरिकी हमलों में 35 से अधिक लोगों के मारे जाने और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने का भी दावा किया गया है. एजेंसी के अनुसार, सेमनन, हमदान, खुजेस्तान, सिस्तान-बलूचिस्तान और बंदर अब्बास सहित कई इलाके प्रभावित हुए हैं. इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
होर्मुज पर बढ़ी चिंता, ऊर्जा बाजार पर नजर
रिपोर्टों के अनुसार, हाल में तनाव कम करने के लिए हुआ शांति समझौता अब प्रभावी नहीं रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं. ईरानी सेना के कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की रेड लाइन है और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से लाल सागर के तेल मार्ग को बाधित करने का आग्रह किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ सकता है. समाचार लिखे जाने तक दोनों पक्षों के कई सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी.