Gumla News : गुमला नगर परिषद में टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने का फैसला लिया है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए गुमला उपायुक्त ने सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता अपर समाहर्ता करेंगे और पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे।
मामला तब चर्चा में आया जब स्थानीय विधायक भूषण बाड़ा ने नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया था, जिसके बाद प्रशासन ने जांच का निर्णय लिया।
विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार टेंडर की शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं कि उसका लाभ किसी विशेष व्यक्ति या समूह को मिल सके। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया को प्रतिस्पर्धात्मक और पारदर्शी बनाने के बजाय कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से नियम बनाए गए।
इन आरोपों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच समिति यह पता लगाएगी कि टेंडर की शर्तें निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप थीं या नहीं।
पार्षद के पुत्र की भूमिका पर भी उठे सवाल
विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वार्ड संख्या 14 की पार्षद मोसर्रत परवीन के पुत्र आसिफ जाफर को लेकर है। आरोप लगाया गया है कि उन्हें टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिससे हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। जांच समिति इस पहलू की भी समीक्षा करेगी कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
समिति करेगी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जांच
गठित सात सदस्यीय समिति टेंडर से जुड़े दस्तावेजों, पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया और चयन संबंधी सभी पहलुओं की जांच करेगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों और पक्षकारों से आवश्यक जानकारी भी ली जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
नगर परिषद से जुड़े इस मामले पर अब स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी।
फिलहाल समिति को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।