Dhanbad News: केंद्र सरकार के खान एवं खनिज संशोधन कानून यानी MMDR के विरोध में झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है. धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर बुधवार को भाकपा माले ने महाधरना दिया. पार्टी नेताओं ने कानून वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके प्रावधानों से झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
रणधीर वर्मा चौक पर जुटे कार्यकर्ता
भाकपा माले के महाधरने में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए. इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और MMDR कानून को वापस लेने की मांग की गई. धरने को संबोधित करते हुए माले नेताओं ने आरोप लगाया कि संशोधित कानून के जरिए केंद्र सरकार झारखंड के खनिज संसाधनों पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहती है. उनका कहना था कि इसका असर खनिज संपदा वाले राज्यों के हितों पर पड़ सकता है और बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
सिंदरी विधायक ने गिनाए राज्य के हित
सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि झारखंड से निकलने वाले खनिजों से मिलने वाला सेस और राजस्व राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उनके मुताबिक, कानून में बदलाव से राज्य के अधिकार और आर्थिक हिस्सेदारी प्रभावित होने की आशंका है.
पूर्व विधायक विनोद सिंह ने आरोप लगाया कि खनिज संशोधन विधेयक को पर्याप्त चर्चा के बिना हंगामे के बीच पारित किया गया. उन्होंने केंद्र सरकार पर बहुमत के बल पर महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने का आरोप लगाया.
कानून पर पुनर्विचार की मांग
महाधरने के दौरान माले नेताओं ने केंद्र सरकार से MMDR कानून पर दोबारा विचार करने की मांग की. साथ ही झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और राजस्व हिस्सेदारी को सुरक्षित रखने की अपील की गई. कार्यक्रम में पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे. माले ने संकेत दिया कि खनिज संसाधनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर उसका विरोध आगे भी जारी रह सकता है.