Border 2 Film Review: करीब तीन दशक पहले देशभक्ति की भावना को पर्दे पर अमर करने वाली फिल्म बॉर्डर के बाद अब बॉर्डर 2 दर्शकों के सामने आई है. 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म के साथ सबसे बड़ी जिम्मेदारी उस विरासत को संभालने की थी, जो 1997 की फिल्म ने बनाई थी. निर्देशक अनुराग सिंह ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहानी को नए विस्तार और नए किरदारों के साथ पेश किया है.
कहानी का फलक और युद्ध की पृष्ठभूमि
फिल्म की कहानी 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौर में आगे बढ़ती है. उस समय भारतीय सेना का बड़ा हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान में तैनात था और पश्चिमी सीमा की सुरक्षा सीमित संसाधनों के साथ कुछ जांबाज जवानों पर निर्भर थी. फिल्म युद्ध के मैदान के साथ साथ सैनिकों के भीतर चल रही भावनात्मक लड़ाई को भी सामने लाती है.
थल, जल और वायुसेना की साझा लड़ाई
बॉर्डर 2 का कैनवास इस बार ज्यादा व्यापक नजर आता है. कहानी केवल जमीन तक सीमित नहीं रहती. वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के जरिए आसमान की लड़ाई दिखाई गई है. नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर महेंद्र एस रावत समुद्री मोर्चे पर दिखाई देते हैं. थल सेना के मोर्चे पर मेजर होशियार सिंह दहिया डटे रहते हैं. इन सभी को दिशा देने का काम लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर करते हैं. तीनों सेनाओं के समन्वय से फिल्म का रोमांच लगातार बढ़ता है.
अभिनय में अनुभव और नई ऊर्जा का मेल
सनी देओल अपने परिचित तेवर और दमदार संवाद अदायगी के साथ फिल्म की रीढ़ बने हुए हैं. उनका स्क्रीन प्रेजेंस आज भी प्रभाव छोड़ता है. वरुण धवन हरियाणवी लहजे और सधे हुए अभिनय से चौंकाते हैं. दिलजीत दोसांझ सादगी और साहस के संतुलन के साथ अपने किरदार को निभाते हैं. अहान शेट्टी अपने किरदार के जरिए सैन्य परिवार की विरासत की झलक देते हैं. महिला किरदारों के रूप में मोना सिंह और सोनम बाजवा युद्ध के पीछे छूट जाने वाले परिवारों के दर्द को संवेदनशीलता से दिखाती हैं.
तकनीकी पक्ष और निर्देशन
लंबे रनटाइम के बावजूद फिल्म की गति बनी रहती है. स्क्रीनप्ले दर्शक को जोड़े रखता है. कुछ युद्ध दृश्यों में तकनीकी स्तर पर और निखार की गुंजाइश महसूस होती है, लेकिन संवाद और बैकग्राउंड म्यूजिक उस कमी को काफी हद तक ढक लेते हैं. पुराने बॉर्डर की याद दिलाने वाला संगीत और नए गीत फिल्म के असर को मजबूत करते हैं.
बॉर्डर 2 एक सीक्वल होने के साथ साथ नई पीढ़ी के लिए देशभक्ति की भावना को नए तरीके से प्रस्तुत करती है. फिल्म पुरानी यादों को ताजा करते हुए आधुनिक युद्ध दृष्टिकोण से कहानी कहती है. यह फिल्म उन दर्शकों के लिए खास है, जो सिनेमा में भावनाओं, बलिदान और राष्ट्रप्रेम को एक साथ देखना चाहते हैं.