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  • 2025-11-01

Bihar News: मोकामा हत्या कांड, दुलारचंद यादव और अनंत सिंह की चुनावी रंजिश की पूरी कहानी

Bihar News: बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में शुक्रवार को तनाव का माहौल रहा जब बाढ़ अनुमंडल अस्पताल जाने वाली सड़क पर ट्रैक्टर ट्रॉली पर एक शव रखा था. 1980 और 1990 के दशक के बाहुबली दुलारचंद यादव की 30 अक्टूबर को दोपहर मोकामा में हत्या कर दी गई. घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. 

मोकामा विधानसभा में 1990 से अनंत सिंह का परिवार काबिज रहा  है, सिर्फ 1990-1995 के पांच साल को छोड़कर. अनंत सिंह को छोटे सरकार कहा जाता है. जेडीयू ने उन्हें फिर टिकट दिया जबकि आरजेडी ने सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को उम्मीदवार बनाया. जनसुराज ने पीयूष प्रियदर्शी को उतारा. दुलारचंद जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे. घटना से एक दिन पहले बुधवार देर शाम टिकारी में हम पार्टी प्रत्याशी अनिल कुमार पर प्रचार के दौरान हमला हुआ. सिवान के दरौंदा में एएसआई अनिरुद्ध कुमार की हत्या भी हुई. ये घटनाएं बिहार में चुनावी हिंसा की पुरानी याद दिलाती हैं.

पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी
दुलारचंद के परिजनों और पीयूष प्रियदर्शी ने हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगाया. अनंत सिंह ने कहा कि वे टाल में वोट मांग रहे थे. एक जगह भीड़ दिखी तो लगा विपक्षी वोट मांग रहे हैं. उनकी तीस गाड़ियां आगे निकल गईं और पीछे दस गाड़ियां रह गईं जिन पर हमला हुआ. यह सूरजभान सिंह की साजिश है. पटना एसएसपी कार्यालय ने कहा कि साढ़े तीन बजे भदौर थाना अधिकारी को सूचना मिली कि अनंत सिंह के काफिले पर हमला हुआ. घोसवरी थाना अधिकारी को भी झड़प की खबर मिली. पुलिस पहुंची तो दो तीन चार चक्का वाहनों के शीशे टूटे थे और एक व्यक्ति का शव वाहन में था और वह दुलारचंद यादव था. पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है एफएसएल जांच कर रही है. मौत संदेहास्पद है और पोस्टमॉर्टम सीसीटीवी साक्ष्य से कारण स्पष्ट होगा. घोसवरी थाने में अनंत सिंह सहित पांच पर नामजद FIR दर्ज हुई.

परिवार को सुरक्षा दी जाए: रविरंजन(दुलारचंद के पोते)
सूरजभान सिंह ने कहा कि घटना से देश की बदनामी हो रही है. चुनाव आयोग जांच बैठाए. रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बने. दुलारचंद यादव के पोते रविरंजन का कहना है कि अनंत सिंह को 24 घंटे में गिरफ्तार किया जाए और परिवार को सुरक्षा मिले. हमारे दादा हंगामा शांत करने गए थे लेकिन अनंत सिंह ने पांव में गोली मारकर गाड़ी चढ़ा दी गई. अनंत सिंह ने आरोपों को सूरजभान की साजिश बताया. सूरजभान ने आरोपों पर जवाब देने से इनकार कर दिया.

सत्ता संरक्षित गुंडों ने की हत्या: तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपराध कुख्यात मोकामा में सत्ता संरक्षित गुंडों ने सामाजिक कार्यकर्ता दुलारचंद की हत्या कर दी. एनडीए प्रत्याशियों का पत्रकारों पर गुस्सा, पत्रकारों को जान से मारने की बात, पूर्व में AK 47 बरामदगी का नतीजा दिख रहा है. मुद्दों से डरकर जुमलेबाजी करने वाले प्रधानमंत्री को अपना गुंडाराज महाजंगलराज नहीं दिखता. भाजपाई बिहार में डेरा डाल अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं. वे महाजंगलराज को संरक्षण देकर बिहार को बदनाम कर रहे हैं. जनता प्रतिकार करेगी और डबल इंजन उखाड़ देगी.

जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि ऐसी हत्याएं लोकतंत्र में निंदनीय हैं लेकिन कानून अपना काम करेगा.

मोकामा टाल में जबरदस्त प्रभाव था दुलारचंद यादव का
75 साल के दुलारचंद तारतर गांव के रहने वाले थे. मोकामा टाल में उनका प्रभाव था. उन्होंने कई बार विधानसभा चुनाव लड़ा. 1995 में बृजनंदन यादव के खिलाफ लड़े. 1990 में बाढ़ लोकसभा उपचुनाव में लालू ने उन्हें सम्मानित किया. पटना पुलिस ने कहा कि दुलारचंद पर हत्या आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं. सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार ने 1990 लोकसभा चुनाव में मदद मांगी. पिछड़ों अति पिछड़ों पर उनका प्रभाव था. वे पैसों से मदद करते थे. तारतर में नीतीश ने उन्हें बुलाया और मोकामा राजनीति में नया नाम बना. दुलारचंद पहलवान जी के नाम से मशहूर थे. लालू ने चरवाहा विद्यालय खुलवाया. विधायक न होने पर भी पटना में फ्लैट, टीवी, गाड़ी मिली. सत्ता की ओट में मार्केट से रंगदारी का अधिकार मिला. बाद में लालू से दूर हुए लेकिन RJD के करीब आए. हाल में तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की बात दोहराते रहे. फिर जनसुराज प्रचार क्यों किया? यह सवाल उठता है.

दुलारचंद चाहते थे कि RJD पीयूष प्रियदर्शी को टिकट दे 
पीयूष प्रियदर्शी 30 साल के बांका के रहने वाले हैं. 2022 उपचुनाव में पहली बार नाम आया. धानुक जाति से हैं. लोकसभा चुनाव लड़े. दुलारचंद चाहते थे RJD पीयूष को टिकट दे लेकिन वीणा देवी को दिया. पीयूष ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर इन सोशल वर्क किया है. मोकामा अनंत सिंह परिवार का गढ़ रहा. 1990 में बड़े भाई दिलीप सिंह ने कांग्रेस के श्याम सुंदर सिंह धीरज को हराया. 1995 में दिलीप जीते. 2000 में सूरजभान जीते. 2005 से अनंत सिंह ने पांच चुनाव जीते. 2022 उपचुनाव में पत्नी नीलम देवी जीती. 64 साल के अनंत सिंह साक्षर हैं. 28 आपराधिक मामले लंबित हैं. अगस्त में आर्म्स एक्ट में बरी होकर जेल से बाहर आए. श्याम सुंदर सिंह धीरज ने कहा कि पार्टियां मास लीडर को हराने के लिए बाहुबली खड़ा करती हैं ताकि साफ सुथरी छचि वाला उम्मीदवार न जीते. प्रचार में बंदूक घूम रही है. जनवरी में सोनू मोनू के साथ गोलीबारी हुई. 

कभी इंडस्ट्रियल हब हुआ करता था मोकामा
मोकामा इंडस्ट्रियल हब था, यूनाइटेड स्प्रिट नेशनल टेक्सटाइल भारत वैगन बाटा फैक्ट्री थीं लेकिन बंद हो गईं और पहचान बाहुबलियों की बनी. तेजस्वी ने मोदी पर हमला किया कि मुद्दों के डर से जुमलेबाज प्रधानमंत्री को अपना गुंडाराज महाजंगलराज नहीं दिखता. जेडीयू प्रवक्ता ने निंदा की लेकिन कानून पर भरोसा जताया. एनडीए जंगलराज मुद्दा बनाता है लेकिन ये हिंसा नीतीश के 20 साल के शासन और थ्री सी यानी क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज़्म पर जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठाती है. क्या बिहार पुराने दौर में लौट रहा है जहां जातीय चुनावी हिंसा बाहुबल राज्य की पहचान बनी.

बिहार चुनाव में हिंसा की परंपरा पुरानी
मोकामा हत्या बिहार चुनाव में हिंसा की पुरानी परंपरा को उजागर करती है जहां अनंत सिंह जैसे बाहुबली का दबदबा बरकरार है. FIR की विस्तृत कहानी गंभीर आरोप लगाती है लेकिन अनंत का खंडन साजिश का दावा करता है. तेजस्वी का तीखा हमला एनडीए पर दबाव बढ़ाता है और महागठबंधन को फायदा दे सकता है. जनसुराज का प्रवेश नया मोड़ देता है. कुल मिलाकर चुनावी हिंसा लोकतंत्र को कमजोर करती है और जनता को मुद्दों पर वोट करने की जरूरत है.
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