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  • 2026-04-03

Assam News: NRC-CAA पर भाजपा पर साधा निशाना, “बांटो और राज करो” की राजनीति का आरोप

Assam News: विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी मौजूदगी को आक्रामक अंदाज में दर्ज कराना शुरू कर दिया है। बोरचल्ला विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा पर जमकर हमला बोला और NRC-CAA को लेकर तीखा बयान देते हुए कहा कहा कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने के बाद से ही NRC और CAA जैसे मुद्दों को लाकर समाज को बांटने का काम कर रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा की राजनीति “बांटो और राज करो” की नीति पर आधारित है, जिससे देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच रहा है।उन्होंने इस चुनाव को आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार की लड़ाई बताते हुए कहा कि जैसे झारखंड में बदलाव संभव हुआ, वैसे ही असम में भी परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि आम जनता को बार-बार लाइन में खड़ा होकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और अब भी लोगों को मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
महिलाओं को ₹9000 देने पर उठाए सवाल, हर महीने सहायता की मांग

महिलाओं के खातों में चुनाव के समय आर्थिक सहायता देने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यहां की महिलाओं के खाते में नौ-नौ हजार रुपये डाले जा रहे हैं, क्या पांच वर्ष के लिए यह पैसा काफी है। उन्होंने सवाल किया कि हर महीने नौ हजार रुपये क्यों नहीं दिए जाते।

उन्होंने कहा कि पहली बार झामुमो असम में औपचारिक रूप से चुनावी मैदान में उतरी है और तीर-धनुष चुनाव चिह्न के साथ जनता के बीच अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। उन्होंने झामुमो और असम के रिश्तों के लिए कहा की यह संबंध नया नहीं है, बल्कि शिबू सोरेन के समय से ही यहां की जनता के साथ जुड़ाव रहा है।

असम की स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागानों का दौरा करने के दौरान उन्होंने मजदूरों और आदिवासी समाज की दयनीय स्थिति को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि जहां देश में विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं असम के कई क्षेत्रों में आज भी लोगों को बिजली, पानी और पक्के मकान जैसी बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि असम की अर्थव्यवस्था चाय बागानों पर टिकी है, लेकिन वहां काम करने वाले मजदूरों को आज भी सम्मानजनक मजदूरी नहीं मिलती, जो सरकार की नाकामी को दर्शाता है।
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