Jharkhand Police Modernization: झारखंड सरकार ने राज्य पुलिस बल को आधुनिक सुविधाओं, अत्याधुनिक हथियारों और विश्वस्तरीय उपकरणों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 10 करोड़ 96 लाख 67 हजार रुपये के भारी-भरकम आवंटन को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत स्वीकृत कुल राशि में केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी तय की गई है, जिसके तहत केंद्र सरकार 6.58 करोड़ रुपये और झारखंड सरकार 4.38 करोड़ रुपये का वहन करेगी. इस संबंध में गृह सचिव ने सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर अवगत करा दिया है.
जेम (GeM) पोर्टल और ओपन टेंडर से ही होगी खरीदारी
सरकार ने उपकरणों की खरीद में पूरी तरह से पारदर्शिता बरतने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. स्पष्ट किया गया है कि पुलिस आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक विभिन्न उपकरणों की खरीद अनिवार्य रूप से जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से ही की जाएगी. इसके लिए झारखंड सरकार के नए “प्रोक्योरमेंट मैनुअल” के कड़े दिशा-निर्देशों का हर हाल में पालन करना होगा. यदि कोई विशेष या अति-आधुनिक सुरक्षा उपकरण जेम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होगा, केवल उसी परिस्थिति में ओपन टेंडर (खुली निविदा) के जरिए उसकी खरीदारी की जा सकेगी.
आईजी प्रोविजन संभालेंगे पैसे की जिम्मेदारी
गृह विभाग ने इस बड़ी राशि के उपयोग और मॉनिटरिंग को लेकर कड़े नियम और जवाबदेही भी तय कर दी है. इसके तहत आईजी प्रोविजन को इस पूरी राशि की निकासी और व्यय का मुख्य नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. इस स्पेशल फंड की निकासी रांची के धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के सचिवालय कोषागार से की जाएगी. इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की पुलिस उग्रवाद और साइबर अपराध जैसे नए खतरों से निपटने के लिए हर स्तर पर पूरी तरह तैयार रहे.
गलत निकासी या हेरफेर पर सीधे नपेंगे अधिकारी
इस पूरी योजना में किसी भी प्रकार के वित्तीय भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. डीजीपी और संबंधित निकासी पदाधिकारी को यह सख्ती से सुनिश्चित करना होगा कि आवंटित राशि का उपयोग केवल और केवल उसी मद में हो जिसके लिए वह स्वीकृत की गई है. गृह विभाग ने कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि फंड के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या अवैध निकासी पाए जाने पर संबंधित आहरण और संवितरण पदाधिकारी (निकासी पदाधिकारी) को ही सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी.