Maharashtra Politics: उध्दव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने बीएमसी चुनाव को लेकर साथ आने का ऐलान किया है. दोनों दलों ने मुंबई के विकास को केंद्र में रखते हुए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया. रविवार को इस गठबंधन को औपचारिक रूप से पेश किया गया, जहां दोनों पक्षों ने मौजूदा राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर खुलकर अपनी बात रखी.
लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और सत्तारूढ दल पर तीखे सवाल उठाए
इस मौके पर राज ठाकरे करीब 20 साल बाद दादर स्थित शिवसेना भवन पहुंचे. शिवसेना भवन में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में राज ठाकरे, उध्दव ठाकरे और संजय राउत एक साथ मंच पर नजर आए. बातचीत के दौरान लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और सत्तारूढ दल पर तीखे सवाल उठाए गए.
वर्षों बाद यहां आकर अजीब सा अनुभव हो रहा: राज ठाकरे
शिवसेना भवन पहुंचने के बाद राज ठाकरे ने कहा कि इतने वर्षों बाद यहां आकर अजीब सा अनुभव हो रहा है. उन्होंने कहा कि लोग उनसे लगातार पूछ रहे हैं कि दो दशक बाद लौटकर कैसा लग रहा है. राज ठाकरे ने कहा कि शिवसेना भवन से उनकी कई पुरानी यादें जुडी हुई हैं और उन सबको बताने में काफी वक्त लगेगा. उन्होंने वर्ष 1975 का जिक्र करते हुए बताया कि जब शिवसेना भवन बना था तब यहां जुलूस और पथराव हुआ था, जिसका जवाब शिवसैनिकों ने अपने तरीके से दिया था.
पहले वोट चोरी होते थे, अब उम्मीदवार छीने जा रहे
उध्दव ठाकरे ने गठबंधन को लेकर कहा कि दोनों दलों का साथ आना महाराष्ट्र की जनता की भावना को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि घोषणापत्र जनता को समर्पित किया गया है. साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र अब केवल नाम का रह गया है. पहले वोट चोरी होते थे, अब उम्मीदवार छीने जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ दल अपने प्रत्याशियों को निर्विरोध जिताने की कोशिश में लगा है.
जिन जगहों पर निर्विरोध चुनाव कराए गए हैं, वहां दोबारा मतदान हो
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को लेकर उध्दव ठाकरे ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल सदन के भीतर करना चाहिए, न कि सडकों पर. उन्होंने मांग की कि जिन जगहों पर निर्विरोध चुनाव कराए गए हैं, वहां दोबारा मतदान हो और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो.
मुंबई का मेयर मराठी ही होगा: उध्दव ठाकरे
मुंबई के मेयर को लेकर चल रही बहस पर उध्दव ठाकरे ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि मुंबई का मेयर मराठी ही होगा. उन्होंने सवाल किया कि जब भाजपा सत्ता में साझेदार थी तब उप महापौर किसे बनाया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि मराठी होना और हिंदू होना एक दूसरे के विरोध में नहीं है. कोस्टल रोड परियोजना को लेकर चल रहे श्रेय विवाद पर तंज कसते हुए उध्दव ठाकरे ने कहा कि एक छोटी योजना को बढा चढाकर पेश किया जा रहा है और हर चीज का श्रेय लेने की होड मची हुई है.
सत्ता किसी के पास स्थायी नहीं रहती
राज ठाकरे ने भी भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता किसी के पास स्थायी नहीं रहती. उन्होंने कहा कि जो लोग आज सत्ता में हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि सत्ता से बाहर होने के बाद क्या होगा. राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र को दूसरे राज्यों की तर्ज पर ढालने की कोशिश हो रही है, जो राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि वडोदरा में हर मेयर गुजराती क्यों होता है, जबकि उसका इतिहास मराठा साम्राज्य से जुडा रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि फिर मुंबई के मेयर को लेकर मराठी होने पर सवाल क्यों उठता है. अब इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तारूढ खेमे की प्रतिक्रिया का इंतजार है.
स्थानीय राजनीति को नई धार देने की कोशिश
शिवसेना और मनसे का यह गठबंधन बीएमसी चुनाव से पहले मराठी अस्मिता और स्थानीय राजनीति को नई धार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. दोनों नेताओं के बयान संकेत देते हैं कि आने वाले चुनाव में मुद्दे विकास के साथ साथ लोकतंत्र और सत्ता के दुरुपयोग पर केंद्रित रहेंगे. यह गठबंधन मुंबई की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है.