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  • 2026-01-04

Jharkhand News: जीत महतो मौत मामला, अर्जुन मुंडा ने की दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, न्यायिक जांच पर टिकी नजर

Jharkhand News: एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुलनगर में पुलिस कस्टडी के दौरान इलाजरत जीत महतो की मौत को लेकर उठे विवाद के बीच पुलिस ने अपना पक्ष सामने रखा है. पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जीत महतो की मृत्यु के बाद दंडाधिकारी की उपस्थिति में विधिवत प्रक्रिया के तहत वीडियोग्राफी के साथ मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम कराया गया है.

कॉम्प्लिकेटेड सेरेब्रल मलेरिया: मेडिकल रिपोर्ट
पुलिस के अनुसार मृत्यु समीक्षा के दौरान मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं पाए गए. एमजीएम अस्पताल में ऑन ड्यूटी चिकित्सक द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि जीत महतो की मौत का कारण कॉम्प्लिकेटेड सेरेब्रल मलेरिया था. पुलिस का कहना है कि उपलब्ध चिकित्सीय और प्रक्रियागत तथ्यों के आधार पर हिरासत में मारपीट के आरोपों की पुष्टि नहीं होती है.

निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
हालांकि पूरे प्रकरण को लेकर उठ रहे सवालों और विवाद को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की दिशा में कदम उठाने की बात कही है. इसी क्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष न्यायिक जांच कराए जाने के लिए अनुरोध पत्र समर्पित किया गया है. अब इस मामले की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी.

पुलिस पर बर्बरता और हिरासत में प्रताड़ना के गंभीर आरोप
उल्लेखनीय है कि गोकुलनगर निवासी जीत महतो की 31 दिसंबर को पुलिस कस्टडी में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर बर्बरता और हिरासत में प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे. इसके बाद मामला राजनीतिक रंग लेने लगा. जमशेदपुर के सांसद बिद्युत वरण महतो, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पीडित परिवार से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी.

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
जीत महतो की मौत का मामला अब प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गया है. पुलिस जहां मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बीमारी से मौत की बात कह रही है, वहीं परिजन और राजनीतिक प्रतिनिधि हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों पर अडिग हैं. ऐसे में न्यायिक जांच ही वह माध्यम है, जिससे दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्षता से परख हो सकेगी. इस प्रकरण का असर न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सिस्टम पर आम लोगों के भरोसे की कसौटी भी बनता दिख रहा है.
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