Hazaribagh News: जेपी केंद्रीय कारा से 30 और 31 दिसंबर की रात तीन कैदियों की फरारी के मामले में जेल प्रशासन पर गाज गिरी है. सुरक्षा में गंभीर लापरवाही के आरोप में आईजी जेल सुदर्शन मंडल ने दो हेड वार्डन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबित कर्मियों में उमेश सिंह और हरेंद्र महतो शामिल हैं. इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हलचल तेज हो गई है.
एसआईटी फरार कैदियों की तलाश
फरारी कांड की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है. एसआईटी फरार कैदियों की तलाश के साथ ही जेल सुरक्षा में हुई चूक और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
धनबाद और रांची के अलावा बिहार के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी
उधर, कैदियों की गिरफ्तारी को लेकर एसआईटी ने दबिश और तेज कर दी है. एसपी के निर्देश पर गठित टीमों ने झारखंड के धनबाद और रांची के अलावा बिहार के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक जांच में अहम सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है. इसी बीच जेपी केंद्रीय कारा को नया जेलर मिल गया है. गुरुवार को अंजय कुमार श्रीवास्तव ने जेलर के रूप में योगदान दिया. वह इससे पहले चाईबासा जेल में पदस्थापित थे. गौरतलब है कि हजारीबाग केंद्रीय कारा में बीते कई महीनों से जेलर का पद खाली था. पूर्व जेलर के निलंबन के बाद से यह पद रिक्त चल रहा था.
हालांकि जेल प्रशासन की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं. वर्तमान में जेल में असिस्टेंट जेलर के आठ पद खाली हैं. इन रिक्तियों के कारण प्रशासनिक कामकाज पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.
प्रशासन इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं
जेपी केंद्रीय कारा से कैदियों की फरारी ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हेड वार्डन के निलंबन से साफ है कि प्रशासन इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. एसआईटी की सक्रियता और कई राज्यों में चल रही छापेमारी से यह संकेत मिलता है कि जल्द ही फरार कैदियों तक पहुंचने की कोशिशें रंग ला सकती हैं. साथ ही लंबे समय से खाली पदों की वजह से जेल प्रशासन पर बढ़ा दबाव भी इस घटना के पीछे एक अहम कारण माना जा रहा है.