Jharkhand: झारखंड में डीजीपी तदाशा मिश्रा को सेवा विस्तार दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार किसी नए अधिकारी को डीजीपी पद की जिम्मेदारी सौंपेगी, लेकिन सरकार ने ऐन वक्त पर उन्हें एक्सटेंशन देने का फैसला कर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।
प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
सरकार के इस निर्णय को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से कटाक्ष किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह फैसला साबित करता है कि राज्य सरकार के लिए अब नियम, कानून, संविधान और न्यायपालिका का कोई महत्व नहीं रह गया है।
मरांडी ने आगे कहा कि यदि इतिहास में कभी “जंगल राज” चलाने वाले शासकों की सूची तैयार की जाएगी, तो उसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम सबसे ऊपर दर्ज होगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि जिस तरह नियमों की अनदेखी की जा रही है, उससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में सरकार किसी राजनीतिक व्यक्ति को भी डीजीपी बना सकती है। यहां तक कि उन्होंने सुप्रियो भट्टाचार्य का नाम लेते हुए कहा कि सरकार की कार्यशैली को देखते हुए यह भी संभव नजर आता है।
नेता प्रतिपक्ष ने बयान में चेतावनी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया
नेता प्रतिपक्ष ने अपने बयान में चेतावनी भरे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भले ही सत्ता में बैठी सरकार कानून और संविधान की अनदेखी कर रही हो, लेकिन ईश्वर से डरना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की लाठी भले ही दिखाई न दे, लेकिन जब पड़ती है तो उसका असर गहरा होता है। उनका कहना था कि सब कुछ ईश्वर की नजर में है और समय आने पर हर किसी को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।
बयान के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा
अपने बयान के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि फिलहाल इतना कहना पर्याप्त है और आने वाले नए साल में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बता दें कि डीजीपी तदाशा मिश्रा के रिटायरमेंट को लेकर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन सरकार के अंतिम समय में लिए गए इस फैसले ने न केवल सभी कयासों को गलत साबित किया, बल्कि विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक नया मुद्दा भी दे दिया है।