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  • 2025-12-30

Jharkhand News: ED ने 2883 करोड़ के शराब घोटाले का किया खुलासा, विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया जांच के केंद्र में

Jharkhand News: प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ के उत्पाद विभाग से जुड़े बहुचर्चित 2883 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने 26 दिसंबर 2025 को इस प्रकरण में एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत दर्ज की है. इस शिकायत में कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इनमें झारखंड एसीबी द्वारा पहले गिरफ्तार किए जा चुके विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया के नाम भी शामिल हैं.

शराब नीति के दुरुपयोग का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य की शराब नीति का योजनाबद्ध तरीके से दुरुपयोग किया गया. जांच एजेंसी के अनुसार एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट ने अवैध कमीशन और बिना हिसाब वाली शराब बिक्री के जरिए भारी मात्रा में काली कमाई की. इस घोटाले में झारखंड से जुड़े दो नामों को अहम बताया गया है. विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया को इस सिंडिकेट का सक्रिय हिस्सा बताया गया है. विधु गुप्ता डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लायर बताए गए हैं और प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं. झारखंड एसीबी ने उन्हें 3 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें 24 अगस्त को जमानत मिल गई थी.

कमीशन और नकली होलोग्राम का आरोप
जांच में आरोप है कि विधु गुप्ता की कंपनी ने झारखंड में होलोग्राम सप्लाई के बदले अधिकारियों को करीब 9 प्रतिशत कमीशन दिया. साथ ही नकली होलोग्राम की सप्लाई का भी आरोप है. ईडी की जांच में यह भी बात सामने आई है कि यह कमीशन तत्कालीन मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे तक भी पहुंचा था. सिद्धार्थ सिंघानिया को नकद राशि के संग्रह से जुड़ा अहम कड़ी बताया गया है. उन्हें झारखंड एसीबी ने 18 जून 2025 को गिरफ्तार किया था और 25 अगस्त को जमानत मिली थी. ईडी के अनुसार दोनों आरोपी अवैध नेटवर्क को संचालित करने में एक दूसरे के पूरक थे. चार्जशीट समय पर दाखिल नहीं होने के कारण विधु गुप्ता को डिफॉल्ट बेल मिली थी.

इस तरह की गई अवैध कमाई
ईडी की जांच में अवैध कमाई के कई तरीके सामने आए हैं. आधिकारिक शराब बिक्री पर सप्लायरों से रिश्वत ली गई. सरकारी दुकानों के जरिए बिना हिसाब की देसी शराब बेची गई जिसमें नकली होलोग्राम का इस्तेमाल हुआ. डिस्टिलरों से बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के नाम पर नियमित वसूली की गई. विदेशी शराब निर्माताओं से कमीशन वसूलने के लिए अलग लाइसेंस व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया. इस घोटाले में कई पूर्व और वर्तमान अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं. नीति में बदलाव और सिंडिकेट को संरक्षण देने की भूमिका को जांच में अहम माना गया है. इसके अलावा फील्ड स्तर के कई अधिकारियों पर भी बिना हिसाब वाली शराब बिक्री में सहयोग करने के आरोप हैं.

झारखंड से जुड़े नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है. झारखंड से जुड़े नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है. आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े नेटवर्क और जिम्मेदारियों को लेकर और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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