Jamshedpur: करनडीह स्थित पावन दिशोम जाहेर सोमवार को एक ऐतिहासिक साक्षी बना, जब ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय गौरव से भर दिया। जैसे ही राष्ट्रपति मंच पर पहुंचीं, पूरा परिसर तालियों की गूंज और पारंपरिक जयकारों से गूंज उठा।
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी बने, जिन्होंने राष्ट्रपति के साथ संयुक्त रूप से समारोह का उद्घाटन किया। मंच पर उनका स्वागत अत्यंत भावनात्मक और सम्मान से परिपूर्ण वातावरण में किया गया, जिसने आदिवासी संस्कृति की गरिमा को और ऊंचा कर दिया।
राष्ट्रगान और पाइपर बैंड ने बांधा समां
पटमदा प्रखंड के बांगुड़दा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने अपने सशक्त पाइपर बैंड प्रदर्शन से सभी का मन मोह लिया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान जन-गण-मन ने पूरे परिसर को अनुशासन, देशभक्ति और गर्व की भावना से भर दिया। राष्ट्रपति ने छात्राओं की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
दीप प्रज्वलन से हुआ समारोह का शुभारंभ
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर महान विद्वान पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा निर्मित ओलचिकी लिपि की शताब्दी वर्षगांठ के समारोह का शुभारंभ किया।
रास्ते भर दिखा जनसमर्थन का उत्साह
राष्ट्रपति का काफिला सोनारी एयरपोर्ट से बिष्टुपुर होते हुए जुगसलाई स्टेशन रोड की ओर बढ़ा, जहां सुबह से ही सड़क के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। जैसे ही राष्ट्रपति का वाहन वहां से गुजरा, लोगों ने तालियों, अभिवादन और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। कई नागरिक इस ऐतिहासिक पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।
दिशोम जाहेर में राष्ट्रपति का आगमन बना गौरव का क्षण
देश की प्रथम नागरिक के पवित्र दिशोम जाहेर परिसर में पहुंचते ही स्थानीय लोगों में उत्साह और भावुकता देखने को मिली। यह क्षण क्षेत्रवासियों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण रहा, जब राष्ट्रपति ने स्वयं उपस्थित होकर आदिवासी भाषा, संस्कृति और ओलचिकी लिपि के गौरवशाली इतिहास को सम्मान दिया।