Jamshedpur Crime News: सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के भुइयांडीह में कारोबारी हरेराम सिंह के आवास के बाहर हुई फायरिंग मामले में पुलिस जांच के दौरान अहम खुलासे हुए हैं. जांच में सामने आया है कि इस वारदात की साजिश धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के इशारे पर रची गई थी, जबकि पूरी योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी रांची जेल में बंद गोलमुरी निवासी दशरथ ने निभाई.
चारों अपराधी ने फायरिंग में अपनी संलिप्तता स्वीकारी
बुधवार को सीतारामडेरा पुलिस ने रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार और घाघीडीह केंद्रीय कारा से दशरथ समेत उसके तीन सहयोगियों रवि महानंद उर्फ गोपला, राज सिंह कश्यप और राजेश गिरी को 72 घंटे की रिमांड पर लेकर थाना लाई, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार रिमांड पर लिए जाने के बाद पूछताछ में चारों आरोपियों ने फायरिंग की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है.
हथियार और रुपये दशरथ ने कराए थे उपलब्ध
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि हरेराम सिंह के घर के बाहर फायरिंग रवि महानंद उर्फ गोपला, राज सिंह कश्यप और राजेश गिरी ने की थी. इस वारदात के लिए हथियार और रुपये दशरथ ने उपलब्ध कराए थे. शुरुआत में दशरथ ने तीनों को दो दो हजार रुपये दिए थे, जिसके बाद आरोपियों ने कार और बाइक से कारोबारी के घर की रेकी की.
पुलिस मुठभेड़ में रवि के पैर में लगी थी गोली
घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी शहर से फरार हो गए थे. बाद में बुंडू थाना पुलिस ने दशरथ को गिरफ्तार कर रांची के होटवार जेल भेज दिया था. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन पिस्तौल और भारी मात्रा में गोलियां बरामद की थीं. वहीं, दशरथ द्वारा उपलब्ध कराए गए पिस्तौल के साथ रवि महानंद उर्फ गोपला सिदगोड़ा स्थित एक कंडम क्वार्टर में छिपकर रह रहा था, जहां पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया. इस दौरान रवि और पुलिस के बीच मुठभेड़ भी हुई थी, जिसमें रवि के पैर में गोली लगी थी.
प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के साथ दशरथ ने रची थी साजिश
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दशरथ धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान और उसके करीबी सुजीत सिन्हा के साथ मिलकर जमशेदपुर और रांची के कारोबारियों से रंगदारी वसूलने का नेटवर्क चला रहा था. इसी कड़ी में प्रिंस खान ने हरेराम सिंह को फोन कर दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी. रकम नहीं मिलने पर दबाव बनाने के उद्देश्य से गिरोह के सदस्यों ने कारोबारी के आवास के पास हवाई फायरिंग की.
फिलहाल सीतारामडेरा पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है. पुलिस वारदात में प्रयुक्त वाहन, अन्य हथियारों और रंगदारी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी में जुटी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
अपराधियों का नेटवर्क भौगोलिक सीमाओं से परे फैला हुआ
यह मामला केवल एक फायरिंग की घटना नहीं, बल्कि झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध और रंगदारी नेटवर्क की गंभीर तस्वीर पेश करता है. प्रिंस खान जैसे कुख्यात के गुर्गों के जरिए कारोबारियों को धमकाना यह दर्शाता है कि अपराधियों का नेटवर्क भौगोलिक सीमाओं से परे फैला हुआ है. धनबाद से दिए गए निर्देश और जमशेदपुर में अंजाम दी गई वारदात पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए बड़ी चुनौती को उजागर करती है.
दशरथ की भूमिका इस पूरे मामले में अहम है, हथियारों की उपलब्धता, छोटी रकम देकर शूटरों को तैयार करना और रेकी के बाद वारदात को अंजाम दिलाना संगठित अपराध के पुराने लेकिन प्रभावी तरीके हैं.
प्रिंस खान गिरोह की कमर तोड़ी जा सकती है?
इस केस में पुलिस की कार्रवाई यह संकेत देती है कि यदि रिमांड के दौरान नेटवर्क की कड़ियों को सही तरीके से जोड़ा गया, तो प्रिंस खान गिरोह की कमर तोड़ी जा सकती है. हालांकि सवाल यह भी है कि कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितनी गंभीरता दिखाता है, क्योंकि रंगदारी की मांग और उसके बाद फायरिंग जैसी घटनाएं राज्य में निवेश और कारोबारी माहौल पर सीधा असर डालती हैं.
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले को केवल फायरिंग तक सीमित रखती है या फिर इसे एक बड़े संगठित अपराध के रूप में लेकर नेटवर्क, फंडिंग और संरक्षण देने वालों तक पहुंच पाती है. यही इस पूरे केस की असली कसौटी होगी.