Jharkhand News: रांची में दर्ज एक हाई प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है. खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराने वाले गिरोह की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले नेटवर्क का एक अहम चेहरा अब कानून की गिरफ्त में है.
डर और दबाव में लेकर 30 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए थे
झारखंड सीआईडी के साइबर क्राइम थाना रांची ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामले में मुख्य आरोपी योगेश सिंह सिसोदिया को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई साइबर क्राइम थाना कांड संख्या 118/24 दिनांक 22 अप्रैल 2024 के तहत की गई. मामला रांची के एक पीड़ित से जुड़ा है, जिसे ठगों ने डर और दबाव में लेकर 30 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए थे.
जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके साथी फोन और वीडियो कॉल के जरिए खुद को केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताते थे. पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी जाती थी और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर तत्काल पैसे भेजने को कहा जाता था. इसी दबाव में पीड़ित ने बताए गए बैंक खाते में 30 लाख रुपये भेज दिए थे. सीआईडी का कहना है कि यह गिरफ्तारी संगठित साइबर ठगी के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम है और आगे भी इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
साइबर अपराधी आम लोगों की मानसिक कमजोरी को निशाना बना रहे
यह मामला दिखाता है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से साइबर अपराधी आम लोगों की मानसिक कमजोरी को निशाना बना रहे हैं. एजेंसियों की सक्रिय कार्रवाई राहत जरूर देती है, लेकिन ऐसे अपराधों पर रोक के लिए जन जागरूकता और तेज कानूनी कार्रवाई दोनों जरूरी हैं.