कोई जानकारी नहीं है लेकिन सुनने के शौकीन
उन्होंने अपने जीवन में उतार-चढ़ाव का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. कुछ दिनों तक नौकरी भी की फिर अपनी गायिकी की दुनिया में आ गए. उन्होंने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान गिटार बजाना सीखा था. उन्हें क्लासिकल गाने की कोई जानकारी नहीं है लेकिन सुनने के शौकीन है.
कामयाबी पर उनके परिवार के लोग भी खुश
उन्होंने कहा कि उनके गाये गीत हर उम्र वर्ग लोग सुनते हैं. उन्होंने कहा कि गाने सुनने के लिए आदमी एक होते हैं लेकिन उनके सुनने के समय अलग-अलग होते हैं कि वे किस समय किस तरह के गाने सुनना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा कि शुरू मेें उनके परिवार को भी लगा कि शायद जिस तरह गांव घर के लोग गाना-बजाना कर अपना जीवनयापन करेंगे शायद ऐसा है लेकिन अब उनकी कामयाबी पर उनके परिवार के लोग भी खुश हैं.
समाहित कर वे अपनी चित्रकला को दर्शाते हैं
उन्होंने कहा कि जब कोरोना काल में पालमपुर में बैठ कर बस के इंतजार में गाने गा रहे थे तभी उनका विडियो वायरस हो गया जिसके बाद उन्हें लोकप्रियता मिली. पद्मश्री चित्रकार भज्जू श्याम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा वे गोंड चित्रकार हैं. उन्होंने कहा कि उनकी चित्रकला में हवाई जहाज पर कहीं जा रहे, उस समय नीचे का दृश्य कैसा लगता, धरती कैसी लगती इन सभी चीजों को समाहित कर वे अपनी चित्रकला को दर्शाते हैं.
समकालीन परिदृश्य दिखने को मिलते
उन्होंने कहा कि पूर्वज जो कहते थे उस समय क्या अनुभूति थी इसे अपनी चित्रकला में दर्शाने का प्रयास करते हैं. पुणे से आए साहित्यकार डा. दामोदर विष्णु ने भी अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी शब्दों को भाषाओं में पेश करते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी कहानी संग्रह में समकालीन परिदृश्य दिखने को मिलते.