Jharkhand: झारखंड सरकार ने 18 फरवरी 2025 से राज्यभर में गुटखा और तंबाकू युक्त उत्पादों पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया था। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया था कि निकोटिन युक्त पदार्थ खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए ऐसे उत्पादों का निर्माण, भंडारण, बिक्री और प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद राज्य के कई शहरों और कस्बों में खुलेआम तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री और होर्डिंग देखी जा रही है।
प्रतिबंध लागू होने के बाद भी बाजारों में गुटखा, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शहरों में लगे विज्ञापन और दुकानों पर चल रही बिक्री यह संकेत देती है कि या तो प्रशासन इस मामले पर नजर नहीं रख रहा है, या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों कहना जानें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पाद युवाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हैं। सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध जनहित में एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की कमी साफ नजर आ रही है।
प्रशासन पर उठे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह प्रतिबंध केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। लोगों की मांग है कि प्रशासन को तत्काल छापेमारी कर अवैध बिक्री और प्रचार पर रोक लगानी चाहिए, साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
झारखंड में तंबाकू प्रतिबंध को लेकर प्रशासन की चुप्पी अब खुद प्रशासन पर ही गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कानून का पालन कब और कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।