Municipal Elections: झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर मेयर पद के आरक्षण पर संशय के बादल छा गए हैं. नगर विकास विभाग ने मेयर पद का आरक्षण आबादी के आधार पर दो वर्गों में बांट दिया है – “क” और “ख”. वर्ग “क” में 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम (रांची और धनबाद) हैं, जबकि वर्ग “ख” में 10 लाख से कम आबादी वाले निगम शामिल हैं.
रांची का मेयर पद ST के लिए आरक्षित
धनबाद को सामान्य घोषित किया गया है, जबकि पुरानी अधिसूचना के तहत यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी. गिरिडीह को SC वर्ग में आरक्षित किया गया है. रांची का मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है, जिसे सही माना जा रहा है. आदित्यपुर का मेयर पद ST के लिए आरक्षित है, जबकि हजारीबाग OBC के लिए तय है. देवघर, धनबाद, चास, मेदिनीनगर और मानगो की मेयर सीटें अनारक्षित (सामान्य) रहेंगी.
धनबाद निवासी शांतनु चंद्रा ने इस नए फॉर्मूले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. उनका तर्क है कि 2011 की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय करना 2025 की आबादी के हिसाब से अनुचित है. 2022 के विधेयक में प्रबंधन दृष्टिकोण से वर्गीकरण का उल्लेख है, लेकिन इसे कैबिनेट से पास कराया गया, राज्यपाल की मुहर नहीं लगी. धनबाद में SC आबादी (2 लाख) अधिक होने के बावजूद सीट सामान्य कर दी गई, जबकि गिरिडीह (30 हजार SC आबादी) में SC के लिए आरक्षित की गई.
सरकार को 17 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने सरकार को 17 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगर आरक्षण में बदलाव होता है, तो आदित्यपुर का मेयर पद सामान्य हो सकता है. चुनाव की तारीखें आगे बढ़ सकती हैं, जिससे राज्य में चुनावी प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनेगी.