गुलामी जैसी स्थिति में धकेला जा रहा
बैठक का मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए व्यापक बदलाव रहे। पार्टी नेताओं ने कहा कि पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए श्रम कोड लागू करना मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला है। उनका आरोप है कि इन नए कानूनों से श्रमिकों की सुरक्षा, नौकरी की स्थिरता और संगठित होकर आवाज उठाने की ताकत कमजोर होगी, जिससे मजदूरों को आधुनिक गुलामी जैसी स्थिति में धकेला जा रहा है।
सीपीआई नेताओं ने चिंता जताते हुए
सीपीआई नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ देश में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, दूसरी ओर महंगाई लगातार आम जनता की कमर तोड़ रही है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
असमानता को देश के लिए गंभीर खतरा बताया
बैठक में किसानों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि किसानों को आज भी उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, खेती की लागत बढ़ती जा रही है और सरकारी नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों के हित में बनाई जा रही हैं। इसके साथ ही मजदूर हितों की अनदेखी और बढ़ती आर्थिक असमानता को देश के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा
सीपीआई नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने ऐलान किया कि इन मुद्दों को लेकर जिला स्तर से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। आने वाले दिनों में जनसभाएं, धरना-प्रदर्शन और जागरूकता अभियान के माध्यम से आम जनता को संगठित कर सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा।
जागरूक करें और संघर्ष को मजबूत बनाएं
बैठक के अंत में पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव और बस्ती-बस्ती जाकर मजदूरों, किसानों और आम लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें और संघर्ष को मजबूत बनाएं।