Political News: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में है. दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद जो मामला शांत होता दिख रहा था, वह अब दोबारा सियासी तापमान बढ़ाने लगा है. कांग्रेस विधायक एच.ए इकबाल हुसैन के बयान के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया है.
जल्द मुख्यमंत्री बन सकते हैं डीके शिवकुमार
रामनगर से विधायक एच.ए इकबाल हुसैन ने दावा किया है कि डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जल्द ही मुख्यमंत्री बन सकते हैं. उनका कहना है कि 6 या 9 जनवरी तक यह बदलाव संभव है. हुसैन के मुताबिक इन्हीं दिनों मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पूर्व मुख्यमंत्री डी देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ते हुए राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन जाएंगे. उन्होंने साफ तौर पर यह भी कहा कि सिद्धारमैया को डीके शिवकुमार को मौका देने के लिए पद छोड़ देना चाहिए.
हुसैन ने यह भी स्पष्ट किया कि तारीख को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं है और यह महज अनुमान है. फिर भी उन्होंने यह भरोसा जताया कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत है. हुसैन को डीके शिवकुमार का करीबी समर्थक माना जाता है और उनका यह बयान सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है.
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर भी CM की कुर्सी के रेस में?
इसी बीच भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना के बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है. सोमन्ना ने कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त बताया है. तुमकुरु में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सत्ता और पद किस्मत से मिलते हैं और उनकी इच्छा है कि परमेश्वर मुख्यमंत्री बनें. उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ उनकी नहीं बल्कि तुमकुरु की जनता की भी भावना है.
डीके शिवकुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर सोमन्ना ने टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह सब किस्मत और आचरण पर निर्भर करता है. उनके इस बयान को कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर भाजपा की सियासी टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है.
सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद निकलेगा हल?
कांग्रेस नेतृत्व स्तर पर भी इस मुद्दे पर हलचल तेज है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात प्रस्तावित है. माना जा रहा है कि इस बैठक में कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर एक बार फिर चर्चा हो सकती है. यह बैठक कांग्रेस की एक बड़ी रैली के बाद होगी.
कर्नाटक में कांग्रेस कितनी मजबूत
कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास मजबूत बहुमत है और सरकार अपने कार्यकाल का आधा समय पूरा कर चुकी है. इसी बीच नेतृत्व परिवर्तन और पीढ़ीगत बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद को ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर बांटने को लेकर कोई समझौता हो सकता है. हालांकि पार्टी या सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
सत्ता के संतुलन को लेकर असमंजस
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही बयानबाजी यह संकेत देती है कि सत्ता के संतुलन को लेकर असमंजस अभी खत्म नहीं हुआ है. खुले तौर पर दावों और भविष्यवाणियों से यह साफ है कि पार्टी के भीतर दबाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है.