Jharkhand News: गिरिडीह जिले में शराब चोरी के मामले में गिरफ्तार तीन लोगों में सबसे चर्चा में है शशि कुमार उर्फ शशि सिंह. वह खुद को वर्षों से स्पेशल ब्रांच का अधिकारी बताता रहा और पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक अधिकांश लोग उसे इसी पहचान से जानते थे. बिहार के नवादा निवासी शशि का गिरिडीह में भव्य मकान है.
पुलिस के अनुसार शशि लगभग डेढ़ दशक से खुद को स्पेशल ब्रांच के कर्मी के रूप में पेश करता था. उसकी कड़क मूंछ, डायरी और रौब-भरी आवाज उसकी पहचान बन चुकी थी. कई वीआईपी या वीवीआईपी कार्यक्रमों में वह स्पेशल ब्रांच की टीम के साथ दिखा करता था और सुरक्षा जांच करता हुआ नजर आता था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट में भी कई तस्वीरें मिली हैं, जिनमें वह सुरक्षा दल के साथ खड़ा है. उसके बारे में ऐसा माना जाता था कि वह गोपनीय खुफिया कार्य करता है.
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 2022 में उत्पाद विभाग द्वारा निमियाघाट से जब्त की गई अवैध शराब को वह चोरी कर रहा था. पुराने परिसदन भवन स्थित गोदाम को सील करके ताला लगाया गया था लेकिन वह गोदाम के बगल वाले कमरे में रहता था. उसने गोदाम का ताला तोड़कर उसी तरह का नया ताला लगाया ताकि विभाग को भनक न लगे. फिर शराब निकालकर बिहार भेजता था.
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गोदाम से करीब 350 पेटी शराब और बड़ी मात्रा में स्प्रिट गायब है. इस मामले में नगर थाना में शशि समेत तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. उत्पाद विभाग मामले की गहन जांच कर रहा है.
शशि का खुद को स्पेशल ब्रांच अधिकारी बताना, वीआईपी-जतन में देना और सुरक्षा पदाधिकारी जैसा रुतबा रखना, उसके लिए भारी पड़ गया. गोपनीयता और सुरक्षा के नाम पर जिस पर भरोसा था, वही शराब चोरी में लिप्त निकला. यह घटना प्रशासनिक खामियों और भरोसे के गलत इस्तेमाल दोनों की ओर इशारा करती है. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था, गोदाम प्रशासन और मानव तस्करी से जुड़े विभागों की जवाबदेही पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है.