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  • 2025-11-25

Bengal Political News: ममता की खुली चेतावनी से बंगाल में सियासी भूचाल, केंद्र और भाजपा पर सीधा वार

Bengal Political News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तनाव गहरा गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन पर किसी भी तरह की कार्रवाई की गई, तो वह पूरा भारत हिला देंगी. यह बयान उन्होंने एक जनसभा में दिया, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उन्हें रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं. ममता ने बताया कि उन्हें हेलीकॉप्टर से यात्रा करनी थी, लेकिन उड़ान की अनुमति अचानक रोक दी गई. इसे उन्होंने अपने खिलाफ साजिश करार दिया और पैदल ही सभा स्थल पहुंचीं. मंच से उन्होंने कहा कि विरोधी उन्हें छू भी नहीं पाएंगे क्योंकि वह उनकी चाल समझ चुकी हैं.

ममता बनर्जी ने रैली के दौरान एसआईआर को लेकर भी केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक बहाना है और असल मकसद एनआरसी को पिछले दरवाजे से लागू करना है. मतुआ बहुल इलाके में आयोजित इस सभा में ममता ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि पहचान के नाम पर लोगों में डर फैलाया जा रहा है. उन्होंने बीएसएफ की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए कि अगर घुसपैठ बंगाल में हो रही है, तो सीमा से गुजर कर लोग आए कैसे. टीएमसी की ओर से बाद में सफाई दी गई कि ममता का बयान पार्टी कार्यकर्ताओं पर किसी भी संभावित हमले के खिलाफ चेतावनी है और इसके विरोध में वह देशभर में यात्रा निकालेंगी.

इस पूरे विवाद पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी घुसपैठियों की पहचान प्रक्रिया से घबराई हुई हैं. भाजपा नेताओं ने उनके बयान को हताशा और बौखलाहट बताया. उधर, बढ़ते तनाव के बीच चुनाव आयोग भी सक्रिय हो गया है. आयोग ने ममता बनर्जी से स्पष्टीकरण मांगा है और टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को 28 नवंबर को सुबह 11 बजे बैठक के लिए बुलाया है. इस बैठक में पार्टी एसआईआर और अन्य मुद्दों पर अपना पक्ष पेश करेगी. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बंगाल की राजनीति में यह टकराव आगे क्या नया मोड़ लेता है.

ममता बनर्जी का यह बयान बंगाल की चुनावी संवेदनशीलता और राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है. एसआईआर और एनआरसी के मुद्दे पर टीएमसी और भाजपा आमने सामने हैं और दोनों इसे अपने राजनीतिक नैरेटिव के केंद्र में रखे हुए हैं. ममता जहां इसे साजिश और डर का माहौल बनाने वाली प्रक्रिया बता रही हैं, वहीं भाजपा इसे पहचान की पारदर्शी पहल कहती है. आयोग की दखल से मामला और गंभीर हो गया है. आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की चुनावी राजनीति को और तीखा कर सकता है.
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