Jharkhand News: रांची स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री के चार अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो सकेगी. राज्य सरकार ने दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट एक्ट की धारा-6 के तहत अनुमति प्रदान कर दी है. इसके साथ ही सीबीआई को झारखंड में इस मामले की जांच के लिए पूर्ण अधिकार मिल गए हैं.
सीबीआई ने राज्य सरकार से अनुरोध किया था कि वह डॉ दया राम, डॉ बसुदेव दास, निर्मल्या चक्रवर्ती और नदीम अहमद के खिलाफ नियमित केस दर्ज करना चाहती है. इनमें अन्य अज्ञात सरकारी और निजी व्यक्तियों को भी संदेह के घेरे में शामिल किया गया है. इन पर गंभीर आरोप लगे हैं जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान शामिल हैं.
जांच एजेंसी को यह भी अनुमति मिली है कि जांच के दौरान यदि कोई नया अपराध या तथ्य सामने आता है तो उसकी भी जांच की जा सकेगी. प्रकरण में निम्न धाराएं लागू की गई हैं.
- IPC 120B आपराधिक साजिश
- IPC 420 धोखाधड़ी
- IPC 468 जालसाजी
- IPC 471 फर्जी दस्तावेज का उपयोग
- PC Act 1988 की धारा 7 रिश्वत और भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध
राज्य सरकार के आदेश के बाद सीआईपी कांके से जुड़ा यह मामला अब केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में आगे बढ़ेगा. कई विभागीय प्रक्रियाओं और वित्तीय लेनदेन की जांच होने की संभावना है.
सीआईपी जैसा महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य संस्थान अगर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरता है तो इसकी विश्वसनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ता है. सीबीआई जांच की अनुमति से स्पष्ट है कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है. जांच खुलने के बाद संस्थान से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की भी परतें खुल सकती हैं. यह भी देखा जाना होगा कि आरोप किस हद तक साबित होते हैं और संस्थान की कार्यप्रणाली पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा.