Bihar Breaking: बिहार की सियासत में नया अध्याय लिखा जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दे दिया है. इसके साथ ही एनडीए घटक दलों के नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. विधानसभा भंग होने के बाद 20 नवंबर को गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा जहां नीतीश 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बिहार के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में वे फिर कमान संभालेंगे.
एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगी. सम्राट चौधरी ने उनका प्रस्ताव रखा और सभी विधायकों ने समर्थन किया. भाजपा विधायक दल की अलग बैठक में सम्राट चौधरी को नेता और विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया. सम्राट ने कहा मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए पार्टी को धन्यवाद. हम बिहार की प्रगति के लिए जी जान लगा देंगे. विजय सिन्हा ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष को धन्यवाद दिया.
शपथ समारोह सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजकर तीस मिनट के बीच होगा. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और एनडीए के कई नेता शामिल होंगे. सूत्र बताते हैं कि भाजपा कोटे से 15 से 16 मंत्री, जेडीयू से एक मुख्यमंत्री और 14 मंत्री, चिराग पासवान की पार्टी से 3, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री शपथ ले सकते हैं. विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है इसलिए नई सरकार जल्दी बनानी पड़ेगी.
दरअसल बिहार चुनाव में एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया. भाजपा ने 100 सीटों पर से 89 जीतीं जबकि जेडीयू ने भी सौ में से 85 सीटें ले लीं. चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने बाईस में से 19, मांझी की पार्टी को 5 और कुशवाहा की पार्टी को 4 सीटें मिलीं. कुल 202 सीटों के साथ एनडीए ने तीन चौथाई बहुमत छुआ लिया.
नीतीश कुमार का यह 10वां शपथ ग्रहण बिहार की राजनीति में उनकी अमिट छाप को और गहरा करेगा जहां वे विकास के प्रतीक बने रहेंगे. भाजपा की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद नीतीश को कमान सौंपना गठबंधन की मजबूती दिखाता है लेकिन सीट बंटवारे में भाजपा का दबदबा साफ झलकेगा. चिराग और छोटे दलों को मंत्रिमंडल में जगह देकर एनडीए ने सभी को संतुष्ट करने की कोशिश की है. विपक्ष महागठबंधन की करारी हार के बाद अब सड़क पर उतरने की तैयारी करेगा लेकिन एनडीए का बहुमत इतना मजबूत है कि सरकार को कोई खतरा नहीं. बिहार के विकास के लिए यह गठबंधन नई ऊर्जा लाएगा लेकिन नीतीश की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए भाजपा की लंबी रणनीति पर नजर रहेगी. शपथ समारोह एनडीए की एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन बनेगा.