Jharkhand Big News: केंद्र प्रायोजित योजनाओं के नाम पर झारखंड सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. विभिन्न विभागों की सुस्ती के चलते राज्य को 24 हजार करोड़ रुपये की धनराशि केंद्र को वापस करनी पड़ रही है. यह वही पैसा है जो विकास कार्यों के लिए मिला था लेकिन बिना खर्च किए बैंकों में पड़ा सड़ रहा था. अब 1 नवंबर से लागू नई SNA SPARSH व्यवस्था के तहत यह राशि आरबीआई के ई कूबर प्लेटफॉर्म से ही जारी होगी और पुरानी पड़ी रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.
सरकार के वित्त विभाग ने सभी विभागों को सख्त पत्र लिखा है कि अनस्पेंट बैलेंस की पूरी रिपोर्ट दें और तुरंत रिफंड की प्रक्रिया शुरू करें. एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी जैसे बैंकों में पड़ी यह राशि अब केंद्र के खाते में चली जाएगी. पहले SNA सिस्टम में केंद्र अपना हिस्सा भेज देता था राज्य उसे निकालकर खर्च करता था लेकिन उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर न देने से केंद्र को शक हुआ कि कहीं यह पैसा दूसरी योजनाओं में तो नहीं लगाया जा रहा. इसी आशंका से SPARSH मॉडल लाया गया जिसमें राज्य मांग करे तभी उतनी राशि मिलेगी और सीधे लाभार्थियों के खाते में जाएगी.
अब विभागों को कोई ढील नहीं मिलेगी. लाभार्थी, किसान, मजदूर, ठेकेदार, पंचायतें, नगर निकाय सबका भुगतान आरबीआई से ही होगा. बिना जरूरत के बैंक में पैसा रखना या ट्रांसफर करना बंद. लेकिन इस बदलाव का सबसे बड़ा नुकसान झारखंड को ही हो रहा है. विभाग लटके कार्यों को पूरा करने में नाकाम रहे तो अब 24 हजार करोड़ लौटाने पड़ेंगे जो राज्य के कैश फ्लो पर भारी दबाव डालेगा. कई विभाग आकस्मिक खर्च के लिए इन्हीं खातों पर निर्भर थे अब उन्हें ई कूबर के चक्कर में इंतजार करना पड़ेगा. बैंकों के डिपॉजिट भी घटेंगे जिससे उनकी कमाई प्रभावित होगी.
कृषि पशुपालन से लेकर स्वास्थ्य उद्योग और वन विभाग तक की योजनाओं की राशि लौटेगी. कृषि उन्नति योजना, नेशनल मिशन नेचुरल फार्मिंग, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम, नेशनल लाइव स्टॉक मिशन जैसे कार्यक्रमों का पैसा बर्बाद हो गया.
- खाद्य आपूर्ति में इंटीग्रेटेड मूवमेंट ऑफ फूड ग्रेन्स, जल संसाधन में इरिगेशन सेंसस.
- महिला बाल विकास में सक्षम आंगनवाड़ी पोषण 2.0 मिशन वात्सल्य, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्वाधार गृह उज्ज्वला, गृह इंदिरा गांधी नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम, नेशनल फैमिली बेनिफिट योजना.
- कल्याण विभाग में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप ट्राईबल, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदया योजना.
- स्कूली शिक्षा में समग्र शिक्षा न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम.
- ग्रामीण विकास में पीएम आवास ग्रामीण, एनआरएलएम मनरेगा.
- ग्रामीण कार्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
- पंचायती राज में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज, अभियान श्रम में इंस्टीट्यूशनल ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर.
- नगर विकास में स्वच्छ भारत मिशन, शहरी पुनर्विकास मिशन, पीएम आवास शहरी.
- पेयजल में जल जीवन मिशन.
- भवन निर्माण में ज्यूडिशियरी इंफ्रास्ट्रक्चर.
- विधि में नेशनल मिशन फॉर सेफ्टी ऑफ वुमन, फास्ट ट्रैक कोर्ट.
- गृह कारा में पुलिस मॉडर्नाइजेशन.
- स्वास्थ्य में आयुष्मान भारत, आरसीएच स्कीम, ह्यूमन रिसोर्स फॉर हेल्थ.
- उच्च शिक्षा में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान.
- उद्योग में पीएम फॉर्मलाइजेशन माइक्रो फूड.
- वन पर्यावरण में फॉरेस्ट फायर प्रिवेंशन प्रोजेक्ट, टाइगर ग्रीन इंडिया मिशन.
दिसंबर तक यह वापसी पूरी करने का लक्ष्य है लेकिन विभागवार आकलन अभी भी अधर में लटका है.
झारखंड सरकार को यह झटका अपनी ही नाकामी का आईना दिखाता है जहां विभाग सुस्ती में विकास को लटकाए बैठे रहे और केंद्र का पैसा बैंकों में ब्याज कमा रहा था. 24 हजार करोड़ लौटाने से राज्य का कैश फ्लो हिल जाएगा ग्रामीण योजनाओं से लेकर शिक्षा स्वास्थ्य तक सब प्रभावित होंगे. यह नुकसान गरीबों का सबसे ज्यादा होगा जो इन योजनाओं पर निर्भर हैं. हेमंत सोरेन सरकार को अब विभागाध्यक्षों पर शिकंजा कसना चाहिए वरना SPARSH सिस्टम से और सख्ती आएगी और अगले बजट में फंडिंग घट सकती है. केंद्र की यह चाल पारदर्शिता लाएगी लेकिन राज्य को सबक लेना होगा कि सुस्ती का खामियाजा जनता भुगतेगी न कि अधिकारी. दिसंबर तक अगर वापसी न हुई तो और ब्याज का बोझ पड़ेगा जो राज्य के कंधों पर अतिरिक्त भार डालेगा.