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  • 2025-11-18

Netaji Subhash University: नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय तीन दिवसीय जियोग्राफर्स कॉन्क्लेव आयोजित

Jamshedpur: नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर के भूगोल विभाग द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय मंथन: द जियोग्राफर्स कॉन्क्लेव प्रोग्राम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत लैंप लाइटनिंग और साईं वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी विभागाध्यक्ष डॉ. श्रद्धा वर्मा उपस्थित रही।



अपने उद्बोधन वक्तव्य में डॉ. श्रद्धा ने कहा *भूगोल और पर्यावरण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वर्त्तमान समय में विकास कार्य अपने तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संतुलन और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

कार्यक्रम में भूगोल विभाग की प्रमुख मौसमी मुर्मू एवं सहायक प्रोफेसर

कार्यक्रम में भूगोल विभाग की प्रमुख मौसमी मुर्मू एवं सहायक प्रोफेसर इशरत परवीन ने "मंथन" के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही भूगोल के अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से मियावाकी की अवधारना को प्रस्तुत किया गया कि प्रकार मियावाकी पद्धति कम समय में सघन वन (Dense Forest) उगाने की एक क्रांतिकारी तकनीक है।

मियावाकी वन पद्धति तेजी से हरियाली बढ़ाकर

 मियावाकी वन पद्धति तेजी से हरियाली बढ़ाकर, जैव विविधता को पुनर्जीवित करके पर्यावरण को लाभ पहुँचाती है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कुछ मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी प्रस्तुत की गई। भूगोल विभाग के विद्यार्थियों हरीश और अमृता द्वारा एक शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।

इसके अलावा, कामिनी ने भी एक सुंदर नृत्य प्रस्तुत

 इसके अलावा, कामिनी ने भी एक सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया, जिसकी दर्शकों ने प्रशंसक की । "मंथन" कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग पौधारोपण अभियान रहा। एनएसएस विभाग अध्यक्ष सहायक प्रोफेसर अभिनव कुमार की निगरानी में भूगोल विभाग के छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर परिसर में कई पौधे लगाए।

इस गतिविधि का उद्देश्य हरियाली को बढ़ावा

 इस गतिविधि का उद्देश्य हरियाली को बढ़ावा देना और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाना था। सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे लगाए गए पौधों की देखभाल करेंगें "मंथन" कार्यक्रम न केवल विश्वविद्यालय परिसर में अकादमिक चर्चाओं को बढ़ावा दिया बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत संदेश भी प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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