Ghatshila By-Elections: झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर मंगलवार को उपचुनाव के दौरान मतदाताओं ने पूरे जोश और उत्साह के साथ मतदान किया. सुबह सात बजे शुरू हुआ मतदान शाम पांच बजे तक शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. इस बार 73.88 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जिसके साथ ही 13 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कैद हो गया. अब सभी की नजरें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब जनता के फैसले का परिणाम सामने आएगा. यह उपचुनाव झामुमो के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के शिक्षा मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन के निधन से खाली हुई सीट पर कराया गया है.
सुबह की हल्की ठंड के बावजूद मतदाताओं में उत्साह चरम पर रहा. 300 से अधिक मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. जैसे-जैसे दिन बढ़ा, मतदान की रफ्तार भी तेज होती गई. ग्रामीण इलाकों के कई बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जबकि शहरी क्षेत्रों में शुरुआत में रफ्तार धीमी रही. महिला मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में खास जोश नजर आया. प्रशासन ने दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए विशेष इंतजाम किए थे ताकि वे बिना किसी कठिनाई के मतदान कर सकें.
इस उपचुनाव में कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से नौ पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं. मुख्य मुकाबला झारखंड मुक्ति मोर्चा के सोमेश चंद्र सोरेन और भारतीय जनता पार्टी के बाबूलाल सोरेन के बीच माना जा रहा है. झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत और भावनात्मक जुड़ाव को भुनाने में जुटा है, वहीं भाजपा केंद्र की योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है.
अन्य उम्मीदवारों में JLKM पार्टी के रामदास मुर्मू, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक की पार्वती हांसदा, भारत आदिवासी पार्टी के पंचायतन सोरेन सहित कई निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं. करीब 70 प्रतिशत नए चेहरों के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है. कई उम्मीदवार समाजसेवा से जुड़े हुए हैं और पहली बार जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं.
शांतिपूर्ण मतदान के बाद अब मतगणना की तैयारियां शुरू हो गई हैं. प्रशासन ने मतगणना केंद्रों के आसपास कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. स्थानीय लोगों में उत्सुकता है कि इस बार घाटशिला की जनता किसे अपना नया प्रतिनिधि चुनती है.
घाटशिला उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं बल्कि झारखंड की बदलती राजनीतिक जमीन की झलक भी है. झामुमो के लिए यह चुनाव अपनी परंपरागत पकड़ को बनाए रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा के लिए यह मौका है अपनी पैठ को और मजबूत करने का. स्थानीय मुद्दे, जनजातीय भावनाएं और दिवंगत नेता रामदास सोरेन की स्मृति इस उपचुनाव के केंद्र में हैं. मतदाताओं की भारी भागीदारी यह संकेत दे रही है कि जनता अपने प्रतिनिधि को चुनने के लिए पहले से अधिक सजग और गंभीर है. अब 14 नवंबर को यह तय होगा कि घाटशिला की जनता भावनाओं के साथ जाएगी या विकास के वादों पर भरोसा जताएगी.