Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2025-11-07

Bihar Elections 2025: बिहार में 60 फीसदी से पार वोटिंग, क्या तेजस्वी के लिए बन गया शुभ संकेत?

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और इस बार वोटर्स का उत्साह देखते ही बन रहा था. राज्य के 18 जिलों की 121 सीटों पर करीब 65 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है. यह पिछले कई चुनावों के मुकाबले काफी ज्यादा है और इससे सियासी हलचल भी तेज हो गई है. चुनाव आयोग ने इसे लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत बताया है और उम्मीद जताई है कि दूसरे चरण में भी वोटिंग का यही जोश बरकरार रहेगा.

इतिहास बताता है कि बिहार में जब-जब वोटिंग प्रतिशत 60 फीसदी से ऊपर गया, तब-तब राष्ट्रीय जनता दल या कांग्रेस ने सत्ता हासिल की है. इसलिए इस बार भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि क्या यह आंकड़ा तेजस्वी यादव के लिए शुभ संकेत साबित होगा.

पहले चरण की वोटिंग ऐसे समय हुई है जब हाल ही में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे. विपक्षी दलों का आरोप था कि आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की है. बावजूद इसके, मतदाताओं का उत्साह देखते हुए कहा जा सकता है कि जनता ने राजनीतिक विवादों को दरकिनार कर वोटिंग में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया.

अब दूसरे चरण में 122 सीटों पर वोटिंग बाकी है. इस चरण में महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कई दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी.

बिहार में 60 फीसदी वोटिंग का इतिहास
पिछले चार दशकों में बिहार में चार बार ऐसा हुआ जब वोटिंग प्रतिशत 60 फीसदी से ऊपर गया और हर बार सत्ता में बदलाव देखने को मिला.

1985 के चुनाव में 56.27 फीसदी वोट पड़े थे और तब कांग्रेस ने अपने दम पर सरकार बनाई थी. इसके बाद 1990 में 62.04 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई और जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने. 1995 में फिर 61.79 फीसदी मतदान हुआ और लालू यादव ने सत्ता में वापसी की.

साल 2000 में जब 62.57 फीसदी मतदान हुआ तो आरजेडी की अगुवाई में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन 2005 में जब वोटिंग घटकर 46.50 फीसदी रह गई, तब लालू-राबड़ी का दौर खत्म हो गया और नीतीश कुमार का युग शुरू हुआ.

नीतीश कुमार के दौर में नहीं पार हुआ 60 फीसदी का आंकड़ा
नीतीश कुमार के शासनकाल में राज्य में विकास और सुशासन के नारे जरूर चले, लेकिन वोटिंग का उत्साह कभी 60 फीसदी तक नहीं पहुंचा. 2010 में 52.73 फीसदी मतदान हुआ, 2015 में 56.91 फीसदी और 2020 में यह आंकड़ा मामूली बढ़त के साथ 57.29 फीसदी पर रुका रहा.

भले ही नीतीश हर बार सत्ता में लौटते रहे, लेकिन वोटिंग प्रतिशत का यह आंकड़ा उनके खिलाफ बनते राजनीतिक मूड का संकेत देता रहा.

क्या 2025 में दोहराएगा इतिहास?
इस बार पहले चरण में 65 फीसदी मतदान ने सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है. महागठबंधन इसे जनता का बदलाव का संकेत बता रहा है, जबकि एनडीए इसे अपनी नीतियों पर भरोसे का परिणाम मान रहा है.

बिहार का इतिहास बताता है कि 60 फीसदी से अधिक वोटिंग का मतलब सत्ता परिवर्तन होता है. और अगर यह पैटर्न दोहराया गया तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है.

बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों, जनभावनाओं और सत्ता विरोधी लहरों पर टिकी रही है. लेकिन इस बार उच्च मतदान यह दिखाता है कि जनता मुद्दों पर वोट दे रही है. बेरोजगारी, महंगाई, और सुशासन जैसे प्रश्नों ने मतदाताओं को जागरूक किया है. अगर इतिहास का ट्रेंड कायम रहा, तो 2025 का चुनाव बिहार में नई सियासी कहानी लिख सकता है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !