Jharkhand News: रामगढ़ से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां झारखंड के प्रसिद्ध उद्योगपति रामचंद्र रुंगटा का निधन हो गया है. बताया गया कि वह लंबे समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली में इलाज के दौरान रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की सूचना मिलते ही रामगढ़, रांची और पूरे राज्य के उद्योग जगत में शोक की लहर फैल गई है. उद्योग से जुड़े लोगों और कर्मचारियों में गहरा दुख व्याप्त है, क्योंकि उन्हें एक दूरदर्शी और जमीनी उद्यमी के रूप में जाना जाता था.
जानकारी के अनुसार, रामचंद्र रुंगटा ने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत कोयले के कारोबार से की थी. धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यावसायिक दायरे का विस्तार करते हुए रामगढ़ जिले में कई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की. उनके द्वारा स्थापित प्रमुख उद्योगों में झारखंड इस्पात (अरगड्डा, रामगढ़), आलोक स्टील (करमा, रामगढ़) और मां छिन्नमस्तिका इस्पात (हेहल-बरकाकाना, रामगढ़) शामिल हैं. इन उद्योगों ने न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी, बल्कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए.
उन्होंने आरसी रुंगटा ग्रुप की नींव रखी, जो आगे चलकर झारखंड के उद्योग जगत में एक बड़ी पहचान बन गया. रुंगटा को उन चुनिंदा उद्योगपतियों में गिना जाता है जिन्होंने राज्य में इस्पात उद्योग को नई दिशा दी और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया. उनके योगदानों की वजह से रामगढ़ को औद्योगिक मानचित्र पर एक अहम स्थान मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि रुंगटा ने केवल कारखाने नहीं लगाए, बल्कि विकास की एक ऐसी धारा शुरू की जिसने कई परिवारों का जीवन बदला.
रामचंद्र रुंगटा का निधन केवल एक उद्योगपति के जाने भर की खबर नहीं है, बल्कि यह झारखंड के उद्योग जगत के इतिहास में एक खाली स्थान बनने जैसा है. उन्होंने जिन उद्योगों की स्थापना की, उनसे असंख्य लोगों को रोजगार मिला और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली. वे ऐसे उद्यमी थे जिन्होंने बाहरी निवेश के बजाय स्थानीय स्तर पर उद्योग विकसित किए. उनका जाना उन आदर्शों का अंत भी है जिनके आधार पर झारखंड जैसे संसाधन-समृद्ध प्रदेश में स्वदेशी औद्योगिक विकास का सपना देखा जाता था.