Jamshedpur News: जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद अब मामला सिर्फ दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच में लापरवाही बरती गई और न्याय दिलाने के बजाय समझौते का दबाव बनाया गया.
घटना 16 अक्टूबर की सुबह की है, जब नाई जागृति संघ बागबेड़ा के उपसचिव की 47 वर्षीय पत्नी वंदना देवी ऑटो से बिष्टुपुर जा रही थीं. ऑटो चालक ने अचानक ब्रेक लगाई, इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार निक्सॉन कार ने जोरदार टक्कर मार दी. इस टक्कर के बाद वंदना देवी सड़क पर गिर गईं और पीछे से आ रही बस ने निक्सॉन कार को टक्कर मार दी. हादसा इतना गंभीर था कि वंदना देवी बुरी तरह घायल हो गईं.
घायल को तुरंत टाटा मेन हॉस्पिटल ले जाया गया. परिवार के अनुसार, इलाज के दौरान अस्पताल का बिल डेढ़ लाख रुपये के करीब पहुंच गया. आर्थिक संकट के कारण परिवार इलाज जारी नहीं रख पाया. आरोप यह भी है कि जैसे ही अस्पताल प्रशासन को पता चला कि परिजन खर्च नहीं उठा सकते, इलाज में लापरवाही बरती गई. इसके बाद मरीज को रिम्स रांची रेफर किया गया, जहां वंदना देवी की मौत हो गई.
हादसे के बाद परिजनों ने जुगसलाई थाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की और एक कर्मी ने कहा कि "जो मिल रहा है ले लो, केस-वेस करोगे तो वो भी नहीं मिलेगा." परिवार का आरोप है कि पुलिस ने सारा दोष ऑटो चालक पर डाल दिया, जबकि हादसे में तीनों वाहन यानी ऑटो, निक्सॉन कार और बस शामिल थे.
फिलहाल पुलिस ने तीनों वाहनों को जब्त कर लिया है, लेकिन परिजन न्याय और उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हैं. उनका कहना है कि न तो दोषियों की पहचान स्पष्ट की गई और न ही पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की गई.
यह मामला केवल सड़क दुर्घटना का दर्दनाक उदाहरण नहीं, बल्कि व्यवस्था की उन कमियों को भी उजागर करता है, जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लिए भटकता रह जाता है. सड़क हादसों के मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद अहम होती है, लेकिन आरोपों से स्पष्ट है कि जांच में पारदर्शिता का अभाव है. अस्पताल में आर्थिक आधार पर इलाज का रवैया चिकित्सा प्रणाली की संवेदनहीनता को दर्शाता है. ऐसे मामलों में जवाबदेही तय किए बिना दुर्घटनाओं को सिर्फ आंकड़ों में बदल देना न्याय के साथ अन्याय होगा. जुगसलाई का यह मामला इस बात की मांग करता है कि सड़क सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और पुलिस जांच, तीनों मोर्चों पर गंभीर सुधार की जरूरत है.