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  • 2025-10-17

Jharkhand News: मुनाफे का झांसा बना लोगों की बर्बादी का कारण, झारखंड CID ने मध्यप्रदेश से आरोपी दबोचा

Jharkhand News: झारखंड CID की रांची साइबर क्राइम थाना टीम ने एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से पवन गौड़ नामक साइबर ठग को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह देशभर में निवेश के नाम पर लोगों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप से ठगकर दिवालिया कर रहा था. जांच में सामने आया कि गिरोह ने अब तक 8.36 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. आरोपी पवन गौड़ की उम्र करीब 24 वर्ष है और वह इतने शातिर तरीके से लोगों को झांसे में लेता था कि वे अपनी मेहनत की कमाई खुद ही उसके बताए खातों में ट्रांसफर कर देते थे. CID की डीएसपी नेहा बाला ने बताया कि कार्रवाई कांड संख्या 109/25 और 110/25 (10 सितंबर 2025) के तहत की गई. आरोपी के पास से मोबाइल, फर्जी सिम कार्ड और व्हाट्सएप चैट बरामद किए गए हैं जिनसे ठगी के पुख्ता सबूत मिले हैं.
पहला मामला : FYERS HNI ऐप के जरिए 3.75 करोड़ की ठगी
पीड़ित को “FYERS SECURITIES PRIVATE LIMITED” नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया. ग्रुप में दोगुना मुनाफा देने का दावा कर विश्वास जीता गया और “FYERS” नाम का एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया गया. ऐप में नकली लाभ दिखाकर भरोसा दिलाया गया कि उनका निवेश सही दिशा में जा रहा है. धीरे-धीरे पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में 3.75 करोड़ रुपये तक ट्रांसफर कर दिए. जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो ऐप गायब हो चुका था और ग्रुप भी डिलीट था.

दूसरा मामला : NOMURA और GTF के नाम पर 4.61 करोड़ की ठगी
दूसरे मामले में फेसबुक विज्ञापन के जरिए संपर्क कर “NOMURA & GTF” नामक फर्जी इनवेस्टमेंट ग्रुप से जोड़ा गया. पीड़ित को “NOMURA” ऐप डाउनलोड कराया गया. यहां भी पहले नकली ग्राफ और मुनाफे की स्क्रीन दिखाई गई. शुरुआत में मुनाफा दिखा कर विश्वास जमाया गया और फिर धीरे-धीरे करोड़ों रुपये निवेश करवाए गए. पीड़ित ने CID को बताया कि पहले दिन लाभ दिखा तो लगा किस्मत खुल गई लेकिन कुछ दिनों बाद सब कुछ गायब हो गया. पैसा, ऐप, ग्रुप सब खत्म हो गया.

15 राज्यों तक फैला नेटवर्क
CID की जांच में पता चला कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते (A/C No. 5824260671) का इस्तेमाल इस ठगी में किया गया. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली जानकारी में इस एक ही खाते के खिलाफ 15 राज्यों से 51 शिकायतें दर्ज हैं. ये राज्य हैं आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल

CID की चेतावनी आम जनता के लिए
CID ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि किसी भी व्हाट्सएप, टेलीग्राम या गूगल विज्ञापन के जरिए मिले निवेश लिंक पर भरोसा न करें. किसी अंजान बैंक खाते या यूपीआई आईडी पर पैसे ट्रांसफर न करें. निवेश केवल सरकारी मान्यता प्राप्त वेबसाइट या ऐप पर ही करें. साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.

तफ्तीश जारी, बाकी सदस्यों की तलाश में CID
डीएसपी नेहा बाला ने कहा कि इस गिरोह में शामिल अन्य बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट्स और व्यक्तियों की पहचान की जा रही है. CID की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को गिरफ्तार किया जा सके

यह मामला केवल वित्तीय ठगी का नहीं बल्कि डिजिटल युग में बढ़ते साइबर भ्रम का भी उदाहरण है. निवेश के लालच में लोग बिना जांच किए करोड़ों रुपये ऐसे प्लेटफॉर्म पर लगा देते हैं जो कानूनी तौर पर अस्तित्व में ही नहीं हैं. ऐप, ग्रुप और नकली ग्राफ के जरिये ठगों ने एक ऐसा भ्रम तैयार किया जिसमें लालच और विश्वास दोनों को साधा गया. मुनाफे का लालच लोगों की वित्तीय समझ पर भारी पड़ गया.

सरकार और एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं लेकिन डिजिटल साक्षरता की कमी और जल्दी अमीर बनने की चाह इन साइबर गैंगों की सबसे बड़ी ताकत बन गई है. यह प्रकरण बताता है कि अब साइबर अपराध केवल तकनीकी अपराध नहीं बल्कि संगठित आर्थिक हमला है जो आम नागरिकों की जीवन भर की कमाई को निशाना बनाता है.
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