शुभ मुहूर्त एवं तिथि
काली पूजा अमावस्या की रात को होती है, जब देवी काली की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विशेष मंत्रों के जाप के साथ पूजा का विधान है। काली पूजा की तिथि: मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025 अमावस्या तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर को सुबह 6:29 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर को सुबह 4:55 बजे काली पूजा निशिता काल मुहूर्त: रात 11:55 बजे से 12:44 बजे तक (21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक) यही समय माँ की विशेष पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
धार्मिक महत्व और परंपराएं
यह पूजा आत्मबल बढ़ाने, शत्रु बाधा नाश करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि माँ काली की पूजा करने से भक्तों के जीवन से भय, रुग्णता और दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं। दिवाली की रात, जब पूरा देश लक्ष्मी पूजन करता है, वहीं बंगाल और पूर्वी भारत में इसी रात माँ काली का पूजन किया जाता है। माँ काली को प्रसन्न करने के लिए भक्त तांत्रिक विधियों से भी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
विशेष भोग और प्रसाद
काली पूजा में माँ काली को विशेष प्रकार का भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें मांसाहारी व्यंजन जैसे मटन, मछली आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा, पेयश (खीर जैसा मीठा पकवान) और अन्य पारंपरिक बंगाली मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं। भोग अर्पित करने के बाद, इन व्यंजनों का वितरण प्रसाद के रूप में किया जाता है।
पूजा सामग्री
पूजा में माँ काली की प्रतिमा या तस्वीर के साथ, भगवान गणेश और विष्णु की मूर्ति, धूप, दीपक, चंदन, अक्षत (चावल), दरबा घास, तांत्रिक प्रतीक (यंत्र), काले तिल, नींबू, नारियल, मिठाई, गुड़, शहद, लाल फूल (विशेष रूप से गुड़हल), काले कपड़े या धागा, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, पंचमेवा और जल, कलश, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग आदि का उपयोग होता है।