Ranchi News: रांची के जैप-1 ग्राउंड में इस बार दिवाली का उत्सव केवल रोशनी और रंगों का नहीं, बल्कि संवेदना और सेवा का भी गवाह बना. इंडियन पुलिस सर्विस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन यानी इप्सोवा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय दिवाली मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने संयुक्त रूप से किया. मेले का माहौल रंगीन झालरों, दीयों की चमक और लोक संस्कृति से सजा था, लेकिन इसकी असली पहचान समाज के प्रति संवेदनशील सोच और जरूरतमंदों के लिए मदद के भाव से झलकती रही.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले की शुरुआत की और कहा कि इप्सोवा केवल एक संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह मेला समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रेरणादायक प्रयास है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के आयोजन झारखंड की पहचान को और मजबूत करते हैं और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं.
मेले में उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ मुख्यमंत्री दंपति का स्वागत किया. मंच के सामने बच्चों द्वारा बनाई जा रही रंगोलियां और पारंपरिक झारखंडी परिधान में पुलिस परिवार की महिलाओं का स्वागत भाव मेले को और खास बना रहा था.
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जैसे पुलिस विभाग जनसुरक्षा का दायित्व निभाता है, वैसे ही इप्सोवा ने समाज के प्रति अपने मानवीय कर्तव्य को निभाते हुए उदाहरण पेश किया है. उन्होंने कहा कि असली त्योहार वही है जब खुशियां किसी एक घर तक सीमित न रहकर सबके जीवन में रोशनी भरें. अगर हम मिलकर किसी एक जरूरतमंद का जीवन भी बदल सकें, तो वही हमारी सच्ची दिवाली होगी.
मेले में झारखंडी लोकनृत्य, बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता और ग्रामीण हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने रांचीवासियों को आकर्षित किया. हर स्टॉल पर एक कहानी थी मेहनत की और आत्मनिर्भरता की. शाम होते ही दीयों की कतारों से मैदान जगमगा उठा, मानो इप्सोवा का हर दीपक किसी आशा की रोशनी बन रहा हो.
संस्था की अध्यक्ष शिखा गुप्ता ने जानकारी दी कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य झारखंड के ग्रामीण इलाकों की महिला समूहों को मंच देना है. यहां वे अपने हस्तशिल्प और घरेलू उत्पाद बेचकर आर्थिक सशक्तिकरण की ओर कदम बढ़ाती हैं. मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि संघर्षरत हाथों को सहारा देने का माध्यम है.