पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना केवल भौतिक समृद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं।
पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि का प्रकट होना
धनतेरस को लेकर सबसे प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब 13वें दिन समुद्र से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। वे हाथ में अमृत कलश लिए हुए थे और साथ ही कई औषधियाँ और धातुएँ उनके साथ थीं।
इसीलिए इस दिन धातु, विशेषकर सोना, चांदी और पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। यह दिन धन, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए अति पवित्र माना जाता है.
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने के मुख्य धार्मिक कारण
भगवान धन्वंतरि का स्मरण, स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि के पूजन से आरोग्य और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए धातुओं की खरीदारी उनकी कृपा का प्रतीक मानी जाती है।
धन और समृद्धि का प्रतीक
सोना और चांदी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इन्हें खरीदने से घर में धनवृद्धि और आर्थिक स्थिरता आती है।
लक्ष्मी कृपा प्राप्ति, मान्यता है कि इस दिन की गई शुद्ध और शुभ खरीदारी से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
यमराज से रक्षा का प्रतीक
एक कथा के अनुसार, किसी राजा के पुत्र की मृत्यु का योग था, लेकिन उसकी पत्नी ने द्वार पर सोने-चांदी के गहनों का ढेर लगाकर दीपक जलाए, जिससे यमराज की आंखें चौंधिया गईं और वे भीतर नहीं जा सके। तभी से यह परंपरा मानी जाती है कि सोना-चांदी खरीदने से मृत्यु का दोष टलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
इस वर्ष धनतेरस का शुभ मुहूर्त
तारीख:18 अक्टूबर 2025 (शनिवार)
धनतेरस पूजन मुहूर्त: सायं 06:05 PM से रात 08:30 PM तक
प्रातःकाल खरीदारी से बचें: सुबह राहुकाल व अशुभ योग हो सकते हैं
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
सोना, चांदी
तांबे/पीतल के बर्तन
झाड़ू (दरिद्रता नाश के लिए)
भगवान धन्वंतरि और लक्ष्मी जी की मूर्तियाँ
पूजा सामग्री, दीपक, धातु के सिक्के
इन चीज़ों को न खरीदें
लोहे की वस्तुएं
कांच या टूटे बर्तन
काले रंग की चीजें
प्लास्टिक
चाकू, कैंची आदि तेजधार वस्तुएं
धनतेरस केवल एक खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि
धनतेरस केवल एक खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, स्वास्थ्य, और धन-संपत्ति की कामना का पर्व है। सोना-चांदी की खरीद न केवल परंपरा है, बल्कि पौराणिक कथाओं में निहित गहरे संदेशों का प्रतीक भी है।