झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी के द्वारा दिए गए वक्तव्य का समर्थन करते हुए, झामुमो के युवा नेता अंकित सिंह ने कहा कि कुणाल षाड़ंगी ने जो सवाल उठाया है, वह व्यक्तिगत नहीं बल्कि एक नैतिक और संवेदनशील मुद्दा है।
चंपई सोरेन पर उठाए गए गंभीर सवाल
आज चंपई सोरेन ने सम्मान और महत्वाकांक्षा की लालसा में पार्टी बदली और भाजपा का दामन थामा। आज वह अपने बेटे को घाटशिला विधानसभा सीट से टिकट दिलाने के लिए दिल्ली में लगातार लॉबिंग में लगे हुए हैं। लेकिन स्व. दिशोम गुरु शिबू सोरेन “गुरुजी” जैसे महान नेता, जिन्होंने झारखंड की अस्मिता, अधिकार और झामुमो की नींव को अपने खून-पसीने से सींचा। उनके जीवन के अंतिम दिनों में चंपई सोरेन का उनका हालचाल नहीं जानने या दिल्ली अस्पताल जाकर न उनसे नहीं मिलना अत्यंत आश्चर्यजनक और दुखद है।
राजनीति स्वार्थ ने रिश्तों को पीछे छोड़ दिया
यह आचरण न केवल संवेदनहीनता को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि राजनीतिक स्वार्थ ने मानवीय रिश्तों और कृतज्ञता की भावना को किस तरह पीछे छोड़ दिया है।
कभी झामुमो में रहते हुए जो व्यक्ति यह तय करते थे कि कौन किस सीट से चुनाव लड़ेगा, आज वही एक सीट के लिए संघर्षरत हैं।
भाजपा गए हुए 1 साल
आज भाजपा में गए चंपई सोरेन को 1 वर्ष से अधिक हो चुका है और वहां उन्हें कितना सम्मान दिया गया है, यह बात स्वयं वे भलीभांति जानते हैं।
आज राजनीति सत्ता की सौदेबाज़ी तक
राजनीति में विचार, सिद्धांत और प्रतिबद्धता सर्वोपरि होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आज कुछ लोग इन्हें व्यक्तिगत स्वार्थ और सत्ता की सौदेबाज़ी तक सीमित कर चुके हैं।
गुरुजी शिबू सोरेन के सिद्धांतों
हम सभी गुरुजी शिबू सोरेन के सिद्धांतों और आदर्शों के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। उनकी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बताए रास्ते पर चलें — जहाँ संघर्ष, समर्पण और सत्यनिष्ठा ही राजनीति का वास्तविक आधार हो।