Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2025-09-21

Mahalaya 2025: “महालया” आज, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और सूर्यग्रहण का संयोग

Mahalaya 2025: धार्मिक मान्यता है कि महालया के दिन मां दुर्गा धरती लोक पर आगमन करती हैं. इस अवसर पर देवी की पूजा-अर्चना विधिविधान से की जाती है और उनका भव्य स्वागत किया जाता है। झारखंड, बिहार और बंगाल में महालया पर विशेष रौनक देखी जाती है. इस साल 21 सितंबर 2025 को महालया के साथ सूर्य ग्रहण का संयोग भी पड़ रहा है. संस्कृत के दो शब्द ‘महा’ और ‘आलय’ से बना महालया का अर्थ है देवी का महान निवास. बंगाल में इसे दुर्गा पूजा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

पितृपक्ष की समाप्ति और दुर्गा पूजा की शुरुआत

महालया के साथ ही पितृपक्ष की समाप्ति होती है और मां दुर्गा की पूजा का आरंभ होता है. इस दिन मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखें बनाते हैं और इसके बाद मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है. पितृपक्ष की अंतिम श्राद्ध तिथि को ही महालया अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को महालया अमावस्या कहा जाता है. इसे पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.

महालया 2025: शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि आरंभ: रविवार, 21 सितंबर 2025, पूर्वाह्न 12:16
अमावस्या तिथि समाप्त: सोमवार, 22 सितंबर 2025, पूर्वाह्न 1:23

अन्य शुभ मुहूर्त

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:38 तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:38 से 1:27 तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:27 से 3:53 तक

महालया 2025: पूजन विधि

महालया के दिन पितरों को श्रद्धांजलि दी जाती है और मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है. इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है:

1. सुबह की तैयारी: स्नान और घर की सफाई के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें.
2. पितृ तर्पण: पुरुष सदस्य अपने पूर्वजों को जल और भोजन अर्पित कर तर्पण करें.
3. ब्राह्मण व प्राणी भोजन: ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें. साथ ही गाय, कुत्ते, चींटियों और कौवों को भी भोजन कराना शुभ माना जाता है.
4. दान और परोपकार: जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और धन का दान करें.
5. मां दुर्गा का आवाहन: इस दिन देवी दुर्गा की पूजा कर नवरात्रि की शुरुआत का स्वागत करें.
6. समापन: पूजा के बाद घर के सदस्य भोजन करें और किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.

महालया का इतिहास

पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर राक्षस को यह वरदान प्राप्त था कि कोई देवता या मनुष्य उसका वध नहीं कर पाएगा. वरदान के प्रभाव से उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया और स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया. देवताओं ने विष्णु और अन्य देवताओं के साथ मिलकर आदिशक्ति की आराधना की. इस आराधना से एक दिव्य तेज प्रकट हुआ, जिसने मां दुर्गा का रूप धारण किया.

शस्त्रों से सुसज्जित मां दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया. इसी घटना की स्मृति में महालया मां दुर्गा के धरती पर आगमन का प्रतीक माना जाता है.

महालया का महत्व

महालया मुख्य रूप से बंगाल का प्रमुख पर्व है, लेकिन देशभर में इसे श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है. बंगाल में लोग पूरे वर्ष इस दिन का इंतजार करते हैं. महालया से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत मानी जाती है.

यह दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिन भी है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है. इस अवसर पर पितरों को तर्पण दिया जाता है. मान्यता है कि तर्पण से पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और उनकी आत्माएं तृप्त होती हैं.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !