Jamshedpur: शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की आराधना के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। 22 सितंबर से कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी, जो कि 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।
आपको बता दे कि इस वर्ष मां का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे समृद्धि, धन-धान्य और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है। वहीं मां का गमन डोली पर होगा, जिसे परंपरागत मान्यता के अनुसार शुभ नहीं माना जाता और यह बीमारी एवं प्राकृतिक आपदा का संकेत माना जाता है।
11 दिनों तक होगी पूजा
आमतौर पर दुर्गा पूजा 9 या 10 दिनों का होता है, लेकिन इस बार षष्ठी तिथि दो दिन पड़ने के कारण कुल 11 दिनों तक पूजा-पाठ चलेगा। हालांकि मां के नौ रूपों की पूजा और दुर्गा पाठ 9 ही दिनों में संपन्न होंगे।
नवरात्र के अंतिम पांच दिन—षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विजयादशमी—विशेष महत्व रखते हैं।
इस साल का प्रमुख तिथिवार कार्यक्रम
महालया – 21 सितंबर, रविवार
महाषष्ठी – 28 सितंबर, रविवार
महासप्तमी – 29 सितंबर, सोमवार
महाअष्टमी – 30 सितंबर, मंगलवार
महानवमी – 1 अक्टूबर, बुधवार
विजयादशमी – 2 अक्टूबर, गुरुवार
कलश स्थापना और पूजा विधि
22 सितंबर को कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त को कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य मृत्युंजय कुमार पांडे के अनुसार, इस बार पूजा का पाठ दोहराया नहीं जाएगा। 9 दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना होगी। 1 अक्टूबर को हवन और 2 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर नीलकंठ दर्शन एवं मां का गमन होगा।
विजयादशमी की तिथि पर स्पष्टीकरण
मंदिर के पुजारी ने बताया कि विजयादशमी का पर्व श्रवणा नक्षत्र और दशमी तिथि में होना चाहिए। लेकिन इस वर्ष 1 अक्टूबर को मध्यान्ह में दशमी और श्रवणा नक्षत्र नहीं पड़ रहा, जबकि 2 अक्टूबर को दोनों का संयोग बन रहा है। इसी कारण विजयादशमी 2 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।