शनिवार को हुए चुनाव में महासचिव का एक, उपाध्यक्ष उद्योग का एक, सचिव पीआरडब्ल्यू का एक पद और सचिव ट्रेड का एक पद के लिए चुनाव हुआ. वहीं, 30 कार्यसमिति सदस्यों में कुल 42 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 30 लोग चुनाव जीतकर आये, जो अधिकांश केडिया और कांवटिया टीम के ही थे. कुल 2059 वोटर्स इस चुनाव में मतदान किया, ऑनलाइन चुनाव प्रक्रिया को संचालित कर रहे सीडीएसएल के अधिकारियों ने बताया कि 55 घंटे तक चली ऑनलाइन वोटिंग के दौरान 1125 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बाकी बचे हुए 948 सदस्य अपनी सुविधा के अनुसार शनिवार को चेंबर भवन में साढ़े ग्यारह बजे से शाम पांच बजे तक वोटिंग किया।
सिंहभूम चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के चुनाव को लेकर व्यापारियों का प्रचार सोमवार को भी चलाया गया। सोमवार को व्यापारियों ने बिष्टुपुर, जुगसलाई और साकची के क्षेत्रों में व्यापारियों से मुलाकात की और एक बेहतर प्रत्याशी को चुनने की अपील की। यह व्यापारी रोज विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारियों से मिलकर जनसंपर्क कर रहे हैं और चुनाव में मतदान अवश्य करने की अपील की।
मतदान एवं मतगणना की प्रक्रिया चार चुनाव अधिकारी आरके झुनझुनवाला, अधिवक्ता पीएस सेन, अधिवक्ता एसएन खंडेलवाल, अधिवक्ता राजेश मित्तल एवं दो 8 स्कूरटनाईजर पीएन शंगारी एवं शीतल स्वाईं चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुआ. मानद महासचिव के पद पर पुनित कांवटिया ने जीत दर्ज की जबकि सत्यनारायण अग्रवाल मुन्ना को हार का सामना करना पड़ा. उपाध्यक्ष इंडस्ट्रीज में हर्ष अग्रवाल (बाकरेवाल), मानद सचिव ट्रेड एंड कॉमर्स में भरत मकानी, मानद सचिव पब्लिक रिलेशन एंड वेलफेयर में सुरेश शर्मा लिप्पू ने जीत दर्ज की. सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में टीम संकल्प कहीं नहीं ठहरी और केडिया और कांवटिया टीम पूरी तरह क्लीन स्विप कर गयी. एक कार्यसमिति सदस्य भी दूसरी टीम का नहीं जीत पाया. एक ओर जहां टीम केडिया कावंटिया का हजारों में वोट लाये, वहीं टीम संकल्प का एक भी व्यक्ति सैकड़ा पार नहीं कर पाया।
सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एससीसीआई) का द्विवार्षिक चुनाव होता है, जिसमें पिछले चुनाव में भी टीम मूनका-केडिया ने क्लीन स्वीप किया था। टीम की लगातार तीसरी बार जीत हुई है। पिछले चुनाव के चुनाव परिणाम ने व्यापारिक समुदाय को स्तब्ध कर दिया है क्योंकि विरोधी सोंथालिया टीम का एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया। उनके अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुरेश सोंथालिया भी 180 वोटों से चुनाव हार गए थे।
चुनाव में कुल 1698 वोट पड़े, जिसमें मूनका को 899 वोट मिले, जबकि सोंथालिया 719 वोटों के साथ पीछे रहे। हार से न केवल सोंथालिया की व्यक्तिगत विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा है, बल्कि सदन में किंगमेकर के रूप में उनकी छवि भी धूमिल हो गई है। इस वर्ष भी टीम संकल्प के पीछे उन्हीं की भूमिका मानी जा रही है।
मतदान प्रक्रिया के दौरान चैंबर सदस्यों द्वारा प्रदर्शित उत्साह ने व्यापारिक समुदाय में इन चुनावों के महत्व और महत्त्व को प्रतिबिंबित किया।