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रांची: झारखंड में लंबे समय से चल रहे भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा कि जब राज्य में लैंड सर्वे का काम शुरू हो चुका है, तो इसे अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया।
खंडपीठ ने कहा कि समय पर लैंड सर्वे पूरा होने से आम लोगों की जमीन के साथ-साथ सरकारी भूमि की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से एक स्पष्ट टाइमलाइन मांगी है कि सर्वेक्षण कार्य कब तक पूरा होगा। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि सर्वे प्रक्रिया में जो कठिनाइयाँ आ रही हैं, उन्हें जल्द से जल्द दूर किया जाए।
कोर्ट ने अगली सुनवाई में राजस्व सचिव को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि लैंड सर्वेक्षण का कार्य कब तक पूर्ण होगा।
इससे पहले महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि राज्य में लैंड सर्वे का काम जारी है। कुछ जिलों में यह कार्य पूरा भी हो चुका है, लेकिन तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण पूरे राज्य में सर्वेक्षण कार्य को पूरा करना संभव नहीं हो पाया है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता गोकुल चंद ने जनहित याचिका दायर करते हुए बताया था कि झारखंड में आखिरी बार वर्ष 1932 में भूमि का सर्वे हुआ था। इसके बाद 1980 में पुनः सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि लातेहार और लोहरदगा जिलों में लैंड सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है।
हाई कोर्ट की यह सख्ती राज्य सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भूमि सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में देरी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।