Jamshedpur: शिक्षा, संस्कृति और संगठन निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के जमशेदपुर विभाग द्वारा आज को-ऑपरेटिव महाविद्यालय में एक दिवसीय अभ्यास वर्ग का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों से आए करीब 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद डॉ. कविता परमार ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया और प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने स्वागत भाषण में सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. पाणी उपस्थित थे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में अर्का जैन विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. अंगद तिवारी, एनआईटी जमशेदपुर के पूर्व प्राध्यापक डॉ. बी.एन. प्रसाद, आरएसएस के विभाग सह-कार्यवाह विद्यासागर लाभ, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व सदस्य श्री मनोज कुमार सिंह, और भौतिकी विभाग, को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार प्रमुख रूप से शामिल रहे।
पहले सत्र में डॉ. रंजीत कर्ण ने अभ्यास वर्ग की संकल्पना एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. विजय कुमार सिंह ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की स्थापना यात्रा और शिक्षा बचाओ आंदोलन की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे न्यास नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
दूसरे सत्र में डॉ. अंगद तिवारी ने प्रबंधन शिक्षा में आत्मानुभूति के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. रंजीत प्रसाद ने संगठन विस्तार और कार्यकर्ता विकास पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि "आत्मानुशासन से ही संगठन निर्माण संभव है।"
अंत में डॉ. पियूष रंजन ने समापन भाषण देते हुए सभी प्रतिभागियों में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। श्रीमती मंजू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि संचालन प्रो. अमर नाथ सिंह ने किया।
यह अभ्यास वर्ग न केवल बौद्धिक विमर्श का केंद्र बना, बल्कि शिक्षकों, विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणास्पद मंच भी साबित हुआ।