Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने नामकुम अंचल की 5.13 एकड़ जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रॉबर्ट एंथनी बरला की एलपीए स्वीकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 के एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया.
1944 में खरीदी गई थी 26.53 एकड़ जमीन
मामला मौजा गुंडू, थाना हटिया की खाता संख्या 16 की जमीन से जुड़ा है. रिकॉर्ड के अनुसार, 26.53 एकड़ जमीन वर्ष 1944 में विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी थी. बाद में इसमें से 8.80 एकड़ जमीन रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी गई. विरोनिका तिर्की की वर्ष 1983 में मृत्यु के बाद उनके चार बेटों ने बची 17.73 एकड़ जमीन का पारिवारिक बंटवारा किया. इसमें 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आई.
पत्नी के नाम हुआ था सक्सेशन म्यूटेशन
जॉन फ्रांसिस कुजूर की मृत्यु के बाद वर्ष 1992 में 5.13 एकड़ जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन उनकी पत्नी डॉ. लुइसा बरला कुजूर के नाम किया गया. बाद में जॉन के भाइयों ने उनके नाम हुए म्यूटेशन को रद्द कराने के लिए मामला दर्ज कराया. हालांकि वर्ष 2007 में यह मामला खारिज कर दिया गया.
दत्तक पुत्र ने दिया था म्यूटेशन का आवेदन
डॉ. लुइसा बरला कुजूर की मृत्यु के बाद उनके कथित दत्तक पुत्र रॉबर्ट एंथनी बरला ने जमीन के लिए सक्सेशन म्यूटेशन का आवेदन दिया. नामकुम के अंचल अधिकारी ने 16 जनवरी 2017 को रॉबर्ट एंथनी बरला के नाम म्यूटेशन कर दिया. इसके खिलाफ दायर अपील और रिवीजन भी खारिज हो गए.
एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ ने किया रद्द
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पाया कि एकल पीठ ने म्यूटेशन को ट्रांसफर के आधार पर हुआ माना था. जबकि रिकॉर्ड से स्पष्ट था कि म्यूटेशन सक्सेशन के आधार पर किया गया था.
अदालत ने कहा कि जमीन के मालिकाना हक का अंतिम विवाद सिविल कोर्ट में तय किया जाएगा. संबंधित टाइटल सूट पहले से लंबित है, इसलिए सभी निजी पक्ष वहां अपना दावा रख सकते हैं. हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि रिकॉर्ड को सही रखने के लिए ऑनलाइन म्यूटेशन आवेदन पर जोर देना राजस्व अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है.