Ranchi News: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद अभय कुमार तिवारी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। अब कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।
पैसे लेकर नौकरी दिलाने का आरोप
अभय तिवारी को मामले में कथित किंगपिन बताया जा रहा है। वह TDPL कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका है। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदारों के साथ-साथ कई अन्य अभ्यर्थियों से पैसे लिए और बदले में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
गोड्डा से हुई थी अभय तिवारी की गिरफ्तारी
रांची पुलिस और CID की कार्रवाई में अभय कुमार तिवारी को 22 जुलाई को गोड्डा से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के वक्त वह गोड्डा जिला के खाद्य आपूर्ति विभाग में पदस्थापित था।
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि TDPL में कार्यरत रहते हुए अभय तिवारी ने चार बार JPSC परीक्षा पास की थी। वह ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रह चुका है।
CID ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर जांच के क्रम में JPSC के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते को भी गिरफ्तार किया गया था। CID ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी, जिसके बाद से वह जेल में हैं।
अभय तिवारी के CID के समक्ष दिए गए कथित स्वीकारोक्ति बयान में पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते का नाम भी सामने आया है। बयान में कथित तौर पर कहा गया है कि TDPL को JPSC परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के तौर पर चयनित किए जाने में एल ख्यांग्ते की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CID की ओर से परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े पूरे मामले की जांच जारी है।