Jharkhand News: झारखंड की PGT 2023 भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की तैयारी में है. छह अभ्यर्थियों का दल दिल्ली रवाना हो रहा है. 11 सितंबर को JPSC-JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले की सुनवाई के दौरान अभ्यर्थी इंटरवेनर के तौर पर अपना पक्ष रखने की तैयारी में हैं.
छह अभ्यर्थी जाएंगे दिल्ली
अभ्यर्थियों का कहना है कि PGT 2023 भर्ती परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं की आशंका है. इसी को लेकर वे सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग उठाने की तैयारी कर रहे हैं. उनके मुताबिक, 3120 पदों पर नियुक्ति के लिए पूरे राज्य में 24 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. अभ्यर्थियों का दावा है कि चयनित उम्मीदवारों में आधे से ज्यादा केवल पांच केंद्रों से हैं.
टॉपर्स को लेकर भी उठाए सवाल
अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि करीब सभी विषयों के टॉपर भी उन्हीं पांच परीक्षा केंद्रों से सामने आए हैं. इसे लेकर उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है. अभ्यर्थी सीटों की कथित सेटिंग और पैसों के लेन-देन की भी जांच की मांग कर रहे हैं.
परीक्षा केंद्रों पर गंभीर आरोप
अभ्यर्थियों का दावा है कि एक संगठित सिंडिकेट के जरिए परीक्षा केंद्रों को कथित तौर पर मैनेज किया गया. परीक्षा के दौरान विशेष ड्रेस कोड और अलग लाइन जैसी व्यवस्थाओं का भी उन्होंने आरोप लगाया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. अभ्यर्थी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
TDPL की परीक्षाओं पर सवाल
अभ्यर्थियों ने TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि इसी एजेंसी के जरिए आयोजित 45 अन्य परीक्षाओं को रद्द कर जांच के आदेश दिए गए थे. उनका सवाल है कि यदि संबंधित परीक्षाओं को लेकर अनियमितताओं की जांच हुई, तो PGT 2023 भर्ती परीक्षा को इससे अलग क्यों रखा गया.
पहले भी कर चुके हैं आंदोलन
अभ्यर्थियों के अनुसार, वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी मांगों को लेकर 45 दिनों तक तत्कालीन राजभवन और 26 दिनों तक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास धरना दिया था. उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के सामने भी अपनी शिकायत रखी. अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली.
हाईकोर्ट में 21 मामलों का दावा
PGT भर्ती को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में 21 मामले दर्ज होने का दावा भी अभ्यर्थियों ने किया है. उनका कहना है कि 2024 से लगातार सुनवाई की तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई. इसी वजह से अब छह अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं. 11 सितंबर की सुनवाई को लेकर उन्हें उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो सकता है.
शिक्षक दिवस पर उठाया भर्ती का मुद्दा
शिक्षक दिवस के मौके पर अभ्यर्थियों ने कहा कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अगर अनियमितता साबित होती है और अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति होती है, तो इसका असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है.
अभ्यर्थियों ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही कहा है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.