Jharkhand High Court: सड़क हादसे में परिवार के कमाऊ सदस्य को खोने वाले परिजनों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है. अदालत ने ट्रेलर चालक मुकेश कुमार चौधरी की मौत से जुड़े मुआवजा मामले में रकम बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दी है. पहले जमशेदपुर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने परिवार को 22.16 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी.
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की पीठ ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने या हादसे में उसकी लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए.
बीमा कंपनी ने लाइसेंस को बनाया आधार
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि मुकेश कुमार चौधरी बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के ट्रेलर चला रहे थे. कंपनी ने इसी आधार पर मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी से राहत की मांग की. हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत के सामने ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो सके कि मृतक के पास वैध लाइसेंस नहीं था.
आमने-सामने टक्कर में मृतक को भी जिम्मेदार ठहराने की कोशिश
यह हादसा 31 मई 2022 को छोटूरमा हट्टाला के पास हुआ था. मुकेश कुमार चौधरी ट्रेलर संख्या JH-05BK-4041 चला रहे थे. इसी दौरान दूसरे ट्रेलर NL-01AD-5697 से उनकी गाड़ी की टक्कर हो गई. हादसे में मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद दूसरे ट्रेलर के चालक रोहित कुमार के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. मामले में पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल किया था.
बीमा कंपनी ने दोनों ट्रेलरों की आमने-सामने हुई टक्कर का हवाला देते हुए मुकेश की भी लापरवाही का दावा किया. लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना. अदालत ने कहा कि केवल आमने-सामने टक्कर होने से मृतक को हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने यह भी गौर किया कि बीमा कंपनी की ओर से पेश किया गया गवाह घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था.
हाईकोर्ट ने आय का भी नए सिरे से आकलन किया
मुआवजे की गणना करते समय हाईकोर्ट ने मुकेश की मासिक आय 16 हजार रुपये मानी. इससे पहले मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने उनकी आय 11,997 रुपये प्रति माह मानी थी. परिजनों की ओर से मुकेश की मासिक आय 45 हजार रुपये बताई गई थी. हालांकि, इस दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके. इसलिए अदालत ने 45 हजार रुपये की आय को स्वीकार नहीं किया.
41 साल की उम्र के आधार पर तय हुआ मुआवजा
हाईकोर्ट ने मृतक की उम्र करीब 41 वर्ष मानते हुए मुआवजे की गणना के लिए 14 का मल्टीप्लायर लगाया. भविष्य में आय बढ़ने की संभावना को देखते हुए आय में 25 प्रतिशत की वृद्धि भी जोड़ी गई. मृतक पर पत्नी, चार नाबालिग बच्चों और मां समेत कुल छह आश्रितों की निर्भरता को ध्यान में रखा गया. व्यक्तिगत खर्च के लिए आय का एक-चौथाई हिस्सा घटाने के बाद मुआवजे की गणना की गई. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मुआवजे की रकम 22.16 लाख रुपये से बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दी.
बीमा कंपनी की अपील खारिज होने के बाद अब परिवार को बढ़ी हुई मुआवजा राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है.