Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में “धोरोम सेनेलेद् 2026” को लेकर संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया. माझी पारगना माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था धाड़ कुचूं बारहा पातकोम सित्र दिशोम, कोल्हान प्रमंडल के संयुक्त तत्वावधान में हुई प्रेस वार्ता में आदिवासी धर्म, संस्कृति और पारंपरिक व्यवस्था के संरक्षण पर चर्चा हुई.
6 सितंबर को होगा मुख्य सम्मेलन
आयोजकों के मुताबिक, “धोरोम सेनेलेद् 2026” का आयोजन 6 सितंबर को कोरोनडीह स्थित दिसोम जाहेरथान में किया जाएगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता तोरोय देश पारगना बाबा बैजू मुर्मू ने की. प्रेस वार्ता में पारगना बाबाओं ने सम्मेलन के उद्देश्यों और आयोजन की तैयारियों की जानकारी दी.
परंपराओं से जुड़ने की अपील
वक्ताओं ने कहा कि संथाल समाज की अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराएं हैं. पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, पूजा-पद्धति, सामाजिक संस्कार और न्याय व्यवस्था को समाज की पुरानी विरासत बताया गया.
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में नई पीढ़ी का पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ाव कम हो रहा है. सम्मेलन के जरिए युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.
धर्म-संस्कृति संरक्षण पर फोकस
आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन में आदिवासी धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ धार्मिक आस्था को मजबूत करने पर चर्चा होगी. इसके अलावा धर्मांतरण को लेकर जागरूकता फैलाने और मारांग बुरु, लुगु बुरु, आजोदिया बुरु सहित अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण का संदेश देने की बात कही गई.
सभी धर्मों के सम्मान की बात
पारगना बाबाओं ने कहा कि आदिवासी समाज सभी धर्मों का सम्मान करता है. साथ ही उन्होंने समाज के लोगों से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूक रहने की अपील की. उन्होंने लोगों से 6 सितंबर को कोरोनडीह में होने वाले सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया.