प्रमुख पैनल चर्चाएं:
पैनल 1: डिजिटल तकनीकों से व्यापार में परिवर्तन
इस सत्र में क्लब महिंद्रा के सीटीओ विकास श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तब तक अधूरा है जब तक वह मानवीय जरूरतों से जुड़ा न हो. इस दौरान इस बात पर भी बल दिया गया कि एआइ और यूएक्स से कहीं ज्यादा जरूरी सीइ यानी इमोशनल कॉन्टिनेंट है. रेकेम आरपीजी की सीडीआइओ मेहजबीं ताज आलम, एलटीआई माइंडट्री की पूर्व निदेशक प्रीति सैनी और इनमोबी ग्रुप के सीडीओ रमण श्रीनिवासन ने भी इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल टूल्स की सफलता, उसके पीछे छुपी समझ पर निर्भर करती है ना कि केवल कोड और एल्गोरिद्म पर.
पैनल 2: एआइ युग में मानवीय नेतृत्व की चुनौती
आज जब हर संगठन एआइ और ऑटोमेशन की तरफ दौड़ रहा है, तब ओरेकल के क्लाउड एवं देवऑप्स लीडरभाबानी महाराणा और एचडीएफसी लाइफ के सीटीओ रोहित किलम जैसे विशेषज्ञों ने एक आवश्यक चेतावनी देते हुए कहा कि तकनीक को मानव के विकल्प की तरह नहीं, सहयोगी की तरह देखा जाना चाहिए. किंद्रिल के कंट्री लीडर, आइटीसी लिमिटेड के टेक्नोलॉजी हेड गौरव शर्मा, फेडबैंक फाइनेंशियल सर्विसेज के सीडीओ शिवकुमार नंदीपाटी व एल्टस ग्रुप के सेंटर हेड लोकेश नाटू ने स्पष्ट किया कि एआइ के साथ नैतिकता और सहानुभूति को जोड़ना आज की सबसे बड़ी नेतृत्व परीक्षा है. यहां इम्पैथेटिक लीडरशिप और ह्यूमन सेंट्रिक एआइ जैसे शब्द केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता के रूप में उभरे.
पैनल 3: डेटा सेंटर वह हृदय है जो अब कंपनियों की धड़कन बन चुका है
इस सत्र में जो गंभीरता दिखी, वह दर्शाता है कि आज डेटा केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व बन चुका है. एनएसइ के साइबर प्रमुख राजीवन कल्लमपुरम ने जहां साइबर डिफेंस की बदलती रणनीतियों पर बात की, वहीं अडाणी हेल्थकेयर के सीडीओ मनीष कुमार , जेनपैक्ट के वीपी ( बिजनेस ऑप्स ) चिरदीप भट्टाचार्य और ऑलस्टेट इंडिया के सीनियर मैनेजर
विपिन गुप्ता ने बताया कि डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर अब किसी बैकएंड सपोर्ट का मामला नहीं, बल्कि बिजनेस इनोवेशन का इंजन है. चर्चा में एड्ज कंप्यूटिंग से लेकर साइबर सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन जैसे मुद्दे उठाए गए, और बताया गया कि इनका सीधा असर व्यापार की निरंतरता व नवाचार पर होता है.