Jamshedpur: एमजीएम अस्पताल को डिमना स्थित नए भवन में शिफ्ट हुए करीब एक साल बीत चुका है. इसके बावजूद अस्पताल में अब तक सरकारी सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लग पाई है. मशीनें नहीं होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है. गंभीर मरीजों को जरूरी जांच के लिए अस्पताल से बाहर जाना पड़ रहा है.
मंत्री के दौरे में मिला था मशीन लगाने का भरोसा
स्वास्थ्य मंत्री के एमजीएम अस्पताल के दौरे के दौरान सरकारी सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन लगाने का आश्वासन दिया गया था. इसके बावजूद अब तक दोनों मशीनें अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो सकी हैं. अस्पताल में सरकारी मशीन लगाने के लिए जगह पहले ही तय की जा चुकी है. सीटी स्कैन के लिए निर्धारित स्थान पर फिलहाल एक निजी कंपनी की मशीन लगी हुई है.
टेंडर प्रक्रिया में हुआ बदलाव
शुरुआत में सरकारी मशीन लगाने की जिम्मेदारी राज्य स्वास्थ्य मुख्यालय स्तर से तय की गई थी. बाद में यह जिम्मेदारी एमजीएम अस्पताल प्रबंधन को दे दी गई. मशीन लगाने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से दूसरी बार टेंडर निकाला गया है. हालांकि, अभी तक सरकारी सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है.
निजी जांच में मरीजों पर बढ़ रहा खर्च
फिलहाल सीटी स्कैन की जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल में काम कर रही निजी एजेंसी की सेवा लेनी पड़ती है या फिर बाहर जाकर जांच करानी पड़ती है. निजी स्तर पर जांच कराने में मरीजों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता. एमआरआई की जांच का खर्च और ज्यादा होने के कारण मरीजों को इसके लिए अस्पताल से बाहर जाना पड़ता है.
सरकारी मशीन लगने पर आयुष्मान मरीजों को राहत
एमजीएम में सरकारी सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन शुरू होने से पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद है. इससे गंभीर मरीजों की जांच समय पर हो सकेगी. जांच के लिए बाहर जाने की परेशानी और अतिरिक्त खर्च से भी मरीजों को राहत मिल सकती है. फिलहाल मशीनों के अभाव में मरीजों को जांच के लिए बाहर भेजना पड़ रहा है. अस्पताल में सरकारी मशीनें कब तक लगेंगी, यह अब भी इंतजार का विषय बना हुआ है.