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  • 2026-08-24

Jharkhand Crime News: झारखंड में साइबर अपराध की जांच में भारी बैकलॉग, 2,730 में से केवल 351 मामलों का हुआ निपटारा

Jharkhand Crime News: साइबर ठगी का शिकार होने के बाद लोग सबसे पहले 1930 पर शिकायत करते हैं. लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद मामले कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. झारखंड में साइबर अपराध से जुड़े 2730 मामलों की समीक्षा हुई. इनमें अब तक सिर्फ 351 मामलों का निपटारा हो सका है. यानी करीब 12.85 फीसदी मामलों में ही कार्रवाई पूरी हुई है. बाकी मामले अभी भी लंबित हैं. इससे साइबर अपराध की जांच और मामलों के निपटारे की रफ्तार को लेकर चिंता बढ़ रही है.

ठगी के पैसे रोकने में भी बड़ी चुनौती
साइबर ठगी के बाद सबसे जरूरी होता है कि ठगी की रकम को बैंक खाते में आगे जाने से रोका जाए. इसके लिए बैंक खाते में रकम को रोकने की प्रक्रिया को "Lien" कहा जाता है. झारखंड में ठगी की रकम रोकने की दर 17.23 फीसदी रही है. यानी बड़ी संख्या में मामलों में ठगी की रकम को समय रहते रोकना पुलिस और बैंकिंग सिस्टम के लिए चुनौती बना हुआ है. हालांकि, 2026 की शुरुआत में इस व्यवस्था में कुछ सुधार देखने को मिला है. बैंक और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल के लिए CFMC में झारखंड के प्रतिनिधियों की तैनाती भी की गई है.

1930 पर शिकायत के बाद तुरंत कार्रवाई जरूरी
साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन 24 घंटे चालू है. इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है. साइबर ठगी में पैसा एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से भेज दिया जाता है. कई बार रकम कुछ ही मिनटों में कई बैंक खातों तक पहुंच जाती है. ऐसे में शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई करना बेहद जरूरी है.

रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर पर नजर
समीक्षा में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर को साइबर अपराध के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है. इन जिलों में म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध स्थानों की संख्या अधिक मिली है. इसके अलावा कई जिलों में ऐसे स्थान भी मिले हैं, जहां साइबर ठगी की रकम ATM के जरिए निकाली जाती है.

मोबाइल और IMEI ब्लॉक करने के मामले भी लंबित
साइबर अपराध की जांच में संदिग्ध मोबाइल नंबर और फोन को ब्लॉक करना भी अहम कार्रवाई है. समीक्षा में मोबाइल नंबर ब्लॉकिंग से जुड़े कई लंबित मामलों की जानकारी सामने आई है. IMEI ब्लॉकिंग के मामलों में भी बैकलॉग है. CIAR और IMEI से जुड़े मामलों को जल्द निपटाना पुलिस के लिए एक और चुनौती है.

337 आरोपियों की गिरफ्तारी
साइबर अपराध के मामलों में अब तक 337 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले दर्ज किए गए हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन मामलों के निपटारे में अभी काफी काम बाकी है.

49 नेटग्रिड यूजर्स में सिर्फ 26 सक्रिय
साइबर अपराध की जांच में तकनीकी जानकारी जुटाने के लिए नेटग्रिड का इस्तेमाल किया जाता है. झारखंड में इसके 49 यूजर्स हैं. लेकिन इनमें सिर्फ 26 ही सक्रिय हैं. 23 यूजर्स फिलहाल सक्रिय नहीं हैं. समीक्षा में नेटग्रिड के बेहतर इस्तेमाल के लिए राज्य और गृह मंत्रालय के बीच समन्वय मजबूत करने की जरूरत बताई गई है. इसके लिए वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव भी दिया गया है.



आंकड़े बता रहे हैं बड़ी चुनौती
झारखंड में साइबर अपराध के 2730 मामलों में सिर्फ 351 मामलों का निपटारा हुआ है. 337 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. ठगी की रकम रोकने की Lien दर 17.23 फीसदी है. वहीं 49 नेटग्रिड यूजर्स में सिर्फ 26 सक्रिय हैं. रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर जैसे जिलों में साइबर अपराध से जुड़े म्यूल खाते और संदिग्ध ठिकाने बड़ी संख्या में मिले हैं. आंकड़े साफ बताते हैं कि साइबर ठगी के खिलाफ सिर्फ शिकायत दर्ज करना काफी नहीं है. शिकायत के बाद कुछ मिनटों में होने वाली कार्रवाई और पुराने मामलों का जल्द निपटारा, दोनों ही पुलिस के लिए बड़ी चुनौती हैं.
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