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  • 2026-08-21

JPSC JSSC Recruitment Controversy: 24 अगस्त से “भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा” निकालेंगे छात्र, 15 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का करेंगे घेराव

JPSC JSSC Recruitment Controversy: रांची में शुक्रवार को JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड की भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाए. मंच के प्रमुख और छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार पर भर्ती मामलों में गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि झारखंड बनने के 26 साल बाद भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं. महतो ने कहा कि अब छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी कि 15 सितंबर को हाईकोर्ट में सरकार ने छात्रों के पक्ष में मजबूती से बात नहीं रखी, तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. हालांकि, इससे पहले 24 अगस्त से छात्रों की "भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा" शुरू होगी. यह यात्रा शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से शुरू की जाएगी.

5 जुलाई से शुरू हुआ था छात्रों का आंदोलन
देवेंद्रनाथ महतो ने बताया कि छात्रों ने 5 जुलाई से आंदोलन शुरू किया था. इसके बाद 25 जुलाई से आंदोलन अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बदल गया. उनके मुताबिक, आंदोलन के दबाव में सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कीं. छह परीक्षाओं की प्रक्रिया रोक दी गई. वहीं, 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया. इसके दो दिन बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, FSO, CDPO और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी.

सरकार की कोर्ट में पैरवी पर सवाल
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सरकार ने हाईकोर्ट में CID की जांच रिपोर्ट को मजबूती से क्यों नहीं रखा, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने पूछा कि सुनवाई के पहले दिन महाधिवक्ता कोर्ट में क्यों मौजूद नहीं थे. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने अपने ही फैसले का मजबूती से बचाव क्यों नहीं किया. महतो ने कहा कि छात्रों की लड़ाई किसी निर्दोष अभ्यर्थी की नौकरी छीनने के लिए नहीं है. उनके मुताबिक, सरकार को जांच के जरिए तय करना चाहिए कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष. दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है.

महतो का आरोप है कि अगर सरकार ने CID की रिपोर्ट और परीक्षा रद्द करने के आधार को कोर्ट में मजबूती से रखा होता, तो शायद सरकार के फैसले पर रोक नहीं लगती.

24 अगस्त से शुरू होगी भर्ती सुधार यात्रा
मंच ने आंदोलन के अगले चरण का भी ऐलान किया है. 24 अगस्त से "भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा" शुरू की जाएगी. यात्रा की शुरुआत शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से होगी. इसके बाद यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों में जाएगी. देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि इस यात्रा का मकसद सिर्फ सरकार का विरोध करना नहीं है. छात्र चाहते हैं कि भविष्य में भर्ती परीक्षाएं बिना गड़बड़ी और धांधली के हों. उन्होंने कहा कि मंत्री के बयानों और CID जांच के आधार पर अब तक 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई हुई है. अब सरकार को भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार करना चाहिए.

15 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेरने की चेतावनी
मंच ने 15 सितंबर की हाईकोर्ट की सुनवाई को अहम बताया है. देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि अगर उस दिन सरकार ने कोर्ट में छात्रों के पक्ष को मजबूती से नहीं रखा, तो छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन को हल्के में नहीं लिया जाएगा. जरूरत पड़ी तो छात्र अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं.

PGT समेत दूसरी परीक्षाओं पर भी सवाल
देवेंद्रनाथ महतो ने PGT भर्ती को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि PGT भर्ती मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है. उनका कहना है कि दूसरी कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं. लेकिन उन मामलों में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. मंच ने मांग की है कि विवादित भर्ती प्रक्रिया के जरिए चयनित और फिलहाल प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण पर भी रोक लगाई जाए. मंच का कहना है कि जांच पूरी होने तक जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.

सरकार के भरोसे के बाद आंदोलन खत्म किया था: राजेश प्रसाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के बाद कई मामलों में गिरफ्तारियां हुईं. JSSC CGL का मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा.
राजेश प्रसाद के मुताबिक, छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए उनके साथ खड़ी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से भरोसा रखने को कहा था. छात्रों ने सरकार की बात पर भरोसा किया और अपना आंदोलन खत्म किया. लेकिन इसके बाद जब JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो पहले दिन महाधिवक्ता कोर्ट में मौजूद नहीं थे. राजेश प्रसाद ने कहा कि सरकार की ओर से मौजूद वकील ने सिर्फ जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा. उनका आरोप है कि सरकार उस दौरान CID जांच और परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का आधार कोर्ट के सामने मजबूती से रख सकती थी.



उन्होंने कहा कि JSSC-CGL मामले में भी सरकार की ओर से प्रभावी तरीके से पक्ष नहीं रखा गया. राजेश प्रसाद के मुताबिक, अगर सरकार ने कोर्ट में अपने फैसले के ठोस कारण रखे होते, तो परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर रोक जैसी स्थिति नहीं बनती. हालांकि, उन्होंने कहा कि मंच फिलहाल यह नहीं मानता कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए कोई साजिश की थी. लेकिन अगर छात्रों का आंदोलन खत्म कराने के लिए फैसले लिए गए और बाद में कोर्ट में उनका मजबूती से बचाव नहीं किया गया, तो यह छात्रों के भरोसे के साथ धोखा होगा. उन्होंने कहा कि कार्मिक विभाग के पत्र में भी यह स्पष्ट किया गया था कि परीक्षाओं के खिलाफ कार्रवाई CID की जांच के आधार पर की गई थी.
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