PM Modi Foreign Tours Cost: मानसून सत्र के दौरान 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री की 23 देशों की विदेश यात्राओं पर कुल 187.83 करोड़ रुपये खर्च हुए. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले कई वर्षों में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर हुआ सबसे अधिक वार्षिक खर्च है.
2021 से 2025 के बीच विदेश यात्रा का खर्च लगातार बढ़ा
राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने चार देशों की यात्रा की थी और इन दौरों पर करीब 36 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. वर्ष 2022 में 10 देशों की यात्राओं पर यह खर्च बढ़कर करीब 55 करोड़ रुपये हो गया. इसके बाद 2023 में 11 देशों के दौरों पर करीब 93 करोड़ रुपये और 2024 में 17 देशों की यात्राओं पर 109.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री ने 23 देशों का दौरा किया और इन यात्राओं पर 187.83 करोड़ रुपये का सरकारी खर्च दर्ज किया गया. यह राशि वर्ष 2024 के मुकाबले करीब 71.5 प्रतिशत अधिक है. वहीं वर्ष 2021की तुलना में 2025 का खर्च पांच गुना से भी ज्यादा रहा. उपलब्ध आंकड़ों में 2021 से 2025 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में फ्रांस का दौरा सबसे अधिक खर्च वाली यात्रा के तौर पर सामने आया है.
2026 में जुलाई तक 13 देशों की यात्रा, खर्च 74.59 करोड़
वर्ष 2026 के शुरुआती सात महीनों में भी प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी खर्च दर्ज हुआ है. जुलाई तक प्रधानमंत्री कुल 13 देशों की यात्रा कर चुके हैं और इन दौरों पर 74.59 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है.
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस राशि में जून 2026 में हुई फ्रांस यात्रा का अंतिम बिलइस राशि में जून 2026ण शामिल नहीं है. ऐसे में अंतिम भुगतान और वित्तीय आंकड़े अपडेट होने के बाद वर्ष 2026 में विदेश यात्राओं पर कुल खर्च बढ़ सकता है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल मिलाकर करीब 557 करोड़ रुपये का सरकारी खर्च हुआ है. यह आंकड़ा 2021 से 2025 तक के खर्च को मिलाकर सामने आया है.
सरकारी खर्च को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
विदेश यात्राओं के खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष का कहना है कि सरकार एक तरफ आम लोगों से ईंधन और ऊर्जा की बचत करने की अपील करती है, वहीं प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी खजाने से बड़ी राशि खर्च की जा रही है.
विपक्षी नेताओं ने इन यात्राओं की उपयोगिता और इनके जरिए देश को हुए आर्थिक लाभ का हिसाब भी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठाई है. दूसरी ओर सत्ता पक्ष का रुख रहा है कि प्रधानमंत्री स्तर की कूटनीतिक यात्राएं भारत के वैश्विक संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के हितों को रखने के लिए जरूरी हैं. सरकार के अनुसार ऐसी यात्राओं का उद्देश्य भारत के दीर्घकालिक कूटनीतिक और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाना है.
फिलहाल राज्यसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी खर्च राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है. वर्ष 2026 के लिए फ्रांस यात्रा का अंतिम वित्तीय विवरण शामिल होने के बाद कुल खर्च का संशोधित आंकड़ा सामने आना बाकी है.